मेट्रो यात्रियों को आखिरी छोर तक परिवहन सुविधा मुहैया करवाने के नाम पर शुरू युलु मिराकल बाइक का अब अनावश्यक इस्तेमाल होने लगा है। एक ओर जहां ट्रैफिक नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही है वहीं, अनहोनी की आशंका भी रहती है।
कम उम्र, ड्राइविंग लाइसेंस की जरूरत न होना समेत सड़कों पर इधर उधर मस्ती में चक्कर काटना कभी भी परेशानी का सबब बन सकता है। महज एक से डेढ़ फुट की ऊंचाई वाली बाइक धड़ल्ले से कनॉट प्लेस, खान मार्केट, इंडिया गेट और राजपथ पर घूमती रहती है।
हेलमेट बगैर बेखौफ सफर करने वालों को न तो खुद की चिंता और न ही कंपनी को। कंपनी की दलील है कि नॉन मोटराइज्ड व्हीकल होने की वजह से न तो रजिस्ट्रेशन और न ही लाइसेंस की जरूरत है।
पिछले वर्ष दिल्ली मेट्रो में सफर करने वाले यात्रियों की सुविधा के लिए ई-बाइक की शुरुआत की गई थी। सर्विस प्रोवाइडर कंपनी के प्रवक्ता का कहना है कि यह एक इलेक्ट्रॉनिक साइकिल है, इसलिए रफ्तार भी अधिकतम 25 से 30 किलोमीटर प्रतिघंटा होती है।
बावजूद इसके, हेलमेट पहनने के लिए सभी को जागरूक किया जाता है। वहीं, अंतिम छोर तक पहुंचने के बजाय व्यस्त सड़कों के इर्द-गिर्द बस और कार के आसपास फर्राटे भरने वाले ई-बाइकर्स की चिंता किसी को नहीं है।
ई-बाइक चलाने वाले किशोरों की ड्राइविंग के दौरान सुरक्षा नियमों की अनदेखी पर चिंता जताते हुए दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने हाल ही में कंपनी के साथ बैठक की। इस दौरान ट्रैफिक पुलिस ने मुख्य सड़कों पर सुरक्षा के लिए जरूरी एहतियात बरतने के निर्देश दिए हैं। ई-बाइक चलाने के लिए कम से कम 16 वर्ष का होना जरूरी है, लेकिन इसकी भी अनदेखी की जा रही है।