राजधानी निवासियों को मकान बनाने के लिए नक्शा पास कराने के शुल्क के साथ-साथ विकास शुल्क भी देना पड़ सकता है। इस संबंध में एमसीडी के आयुक्त ने एक प्रस्ताव तैयार किया है।
राजधानी निवासियों को मकान बनाने के लिए नक्शा पास कराने के शुल्क के साथ-साथ विकास शुल्क भी देना पड़ सकता है। इस संबंध में एमसीडी के आयुक्त ने एक प्रस्ताव तैयार किया है और यह प्रस्ताव मंगलवार को एमसीडी के सदन की बैठक के एजेंडे में शामिल है। लिहाजा प्रस्ताव का भविष्य एमसीडी में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी के रुख पर निर्भर करेगा।
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राजधानी में मकान बनाने के लिए नक्शा पास कराने के शुल्क के साथ विकास शुल्क वसूलने की पूर्ववर्ती उत्तरी दिल्ली नगर निगम ने वर्ष 2020 में शुरूआत की थी। उसकी तरह यह शुल्क के लिए पूर्ववर्ती दक्षिण दिल्ली नगर निगम के आयुक्त भी प्रस्ताव लाए थे, लेकिन सत्तापक्ष के पार्षदों ने उनका प्रस्ताव रद्द कर दिया था। वहीं पूर्ववर्ती पूर्वी दिल्ली नगर निगम ने इस दिशा में कोई पहल नहीं की थी। अब तीनों नगर निगम का विलय होने के बाद एमसीडी के आयुक्त ने पूरी दिल्ली से विकास शुल्क वसूलने का प्रस्ताव तैयार किया है।
आयुक्त ने उत्तरी दिल्ली नगर निगम में लागू प्रस्ताव में कई संशोधन किए है। उन्होंने विकास शुल्क की दर कम करने के साथ-साथ पूरे भूखंड के बजाए केवल उतने ही क्षेत्र का विकास लेने का निर्णय लिया है जितने में निर्माण किया जाएगा। इसके अलावा उन्होंने विकास शुल्क दर वसूलने की श्रेणियों में भी परिवर्तन किया है। आयुक्त ने आवासीय मामले में पहली श्रेणी में 250 वर्गमीटर तक के भूखंड से सर्कल दर का 0.05 प्रतिशत और दूसरी श्रेणी में 250 वर्गमीटर से अधिक बड़े भूखंड से सर्कल दर का 0.10 प्रतिशत विकास शुल्क लेने का निर्णय लिया है, जबकि उत्तरी दिल्ली नगर निगम ने पहली श्रेणी में 50 वर्गमीटर तक के भूखंड से सर्कल दर का 0.10 प्रतिशत और दूसरी श्रेणी में 50 वर्गमीटर से बड़े भूखंड से सर्कल दर का 0.20 प्रतिशत विकास शुल्क लेने का प्रस्ताव लागू किया था।
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निजी स्कूल निर्माण में उपयोग वाले भूखंड पर विकास शुल्क
दूसरी ओर आयुक्त ने सरकारी भूमि, निजी स्कूल, अस्पताल, सिनेमा घर, रियल एस्टेट आदि से जुड़े भूखंडों के मामले में पूरे भूखंड के बजाए केवल निर्माण में उपयोग हुए भूखंड का विकास शुल्क लेने का निर्णय लिया है। इसके अलावा व्यवसायिक मामले व कृषि भूमि व निजी भूमि नीति के तहत आने वाले भूखंड से भी पहले की तुलना में आधा विकास शुल्क लेने का प्रावधान किया है।