छेड़छाड़ के मामले में दोषी ठहराए गए शख्स को सुधरने का मौका देते हुए सत्र अदालत ने सजा में संशोधन किया और उसे एक दिन कोर्ट में खड़े रहने की सजा दी है। सत्र अदालत ने अपने फैसले में कहा कि दोषी को जेल भेजने से उसका भविष्य व परिवार बर्बाद हो जाएगा।
निचली अदालत ने दोषी को इस मामले में दो साल कैद की सजा सुनाई थी। रोहिणी जिला अदालत के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विद्या प्रकाश ने मोहम्मद जाकिर को दोषी मानते हुए निचली अदालत के फैसले को खारिज करने से इनकार कर दिया लेकिन उसे सुधरने का मौका देने के लिए उसकी सजा में बड़ा संशोधन कर दिया।
सत्र अदालत ने जाकिर को दोषी मानते हुये सात हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। इस राशि में से साढ़े छह हजार रुपये पीड़िता को दिए जाएंगे।