दुष्कर्म के मामले में बरी शख्स को अदालत ने उसके खिलाफ झूठा मुकदमा दर्ज करवाने वाली महिला के खिलाफ मुकदमा करने और हर्जाना लेने की छूट दी है। अदालत ने कहा झूठे मुकदमे के कारण आरोपी को बेइज्जती व आघात झेलना पड़ा।
अदालत ने कहा मुकदमा बेशक खत्म हो गया है लेकिन आरोपी का दर्द खत्म नहीं हुआ है क्योंकि उसे फंसाए जाने पर तो हंगामा हुआ होगा लेकिन उसके बरी होने पर किसी का ध्यान नहीं जाएगा।
तीस हजारी की अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश निवेदिता अनिल शर्मा ने अपने फैसले में कहा कि बरी होने के बाद भी उस शख्स को दुष्कर्म का आरोपी होने का दंश जीवन भर रहेगा।