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योगेंद्र की छुट्टी, संजय सिंह नए प्रवक्ता

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आम आदमी पार्टी ने टीम योगेंद्र पर एक और वार किया है। पार्टी ने न सिर्फ योगेंद्र यादव को मुख्य प्रवक्ता के पद से हटा दिया है बल्कि 20 प्रवक्ताओं की सूची में प्रशांत भूषण व आनंद कुमार का भी नाम शामिल नहीं किया।
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मंगलवार देर रात जारी सूची के मुताबिक, आम आदमी पार्टी के मुख्य प्रवक्ता संजय सिंह होंगे। कुमार विश्वास, पंकज गुप्ता, आशुतोष, आशीष खेतान, दलीप पांडेय, कपिल मिश्रा, पी रेड्डी समेत बीस लोगों के नाम सूची में है। पार्टी ने दीपक वाजपेयी को मीडिया कॉर्डिनेटर बनाया है।

इस नई सूची में केजरीवाल पर ब्लॉग बम फोड़ने वाले मयंक गांधी को भी बाहर का रास्ता दिखा गया है। साथ ही केजरीवाल खेमे के नवीन जयहिंद, गोपाल राय और मनीष सिसोदिया को भी प्रवक्ता पद से हटाया गया है।
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अपने आदर्श से भटक गई है आप

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल बेशक आम आदमी पार्टी के भीतर सब ठीक होने का दावा कर रहे हों, लेकिन नेताओं के बगावती सुर पार्टी में सब कुछ गड़बड़ होने का संकेत दे रहे हैं। आप के पूर्व आंतरिक लोकपाल एडमिरल रामदास, वरिष्ठ नेता योगेंद्र यादव व प्रशांत भूषण के बाद अब राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य राकेश सिन्हा ने भी पार्टी के फैसलों पर सवाल उठाए हैं। सिन्हा के मुताबिक, पार्टी अपने आदर्श से भटक गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक की भी उन्हें जानकारी नहीं दी गई थी। वहीं, पार्टी ने उनके सभी आरोपों को नकार दिया है।

प्रोफेसर राकेश सिन्हा ने पार्टी नेतृत्व को एक चिट्ठी लिखी है। इसमें उन्होंने पार्टी के आदर्श से भटकने का आरोप लगाया है। साथ ही आंतरिक लोकपाल को हटाने के तरीके का भी विरोध किया है। उनका मानना है कि आप ने रामदास के साथ सही व्यवहार नहीं किया। इससे उनका अपमान हुआ। राष्ट्रीय कार्यकारिणी की जिस आपातकालीन बैठक में लोकपाल को निकाला गया, उसकी सूचना भी उन्हें नहीं दी गई थी। कुछ बड़े फैसले जल्दबाजी में लिए गए। सबसे ज्यादा हैरत नए लोकपाल की नियुक्ति पर हुई। पद से हटते समय लोकपाल को अपना उत्तराधिकारी तय करना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। जिस सोच के साथ पार्टी इस वक्त काम कर रही है उसके लिए इसका गठन नहीं हुआ था।

बता दें कि आंतरिक लोकपाल के पद से हटाने के बाद रामदास ने कहा था कि पिछले महीने जब पार्टी की अनौपचारिक बैठक हुई थी तो उनसे कहा गया था कि वह पांच साल इस पद पर बने रहेंगे, लेकिन पद से हटाने की खबर भी पार्टी ने नहीं दी। मीडिया के जरिए उन्हें जानकारी मिली कि अब पार्टी उनकी सेवाएं नहीं चाहती हैं। दूसरी तरफ पार्टी का कहना है कि राष्ट्रीय परिषद की बैठक की सूचना सभी सदस्यों को दी गई थी। सभी प्रक्रियाओं में पार्टी संविधान का पालन किया गया है। प्रोफेसर सिन्हा गलत बयान दे रहे हैं।

कार्यकारिणी से ‘आप’ नेताओं को बाहर करना डरावना: शिवसेना

आम आदमी पार्टी के नेताओं प्रशांत भूषण और योगेंद्र यादव को पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी से निकालने को शिवसेना ने डरावना बताया है। शिवसेना ने मंगलवार को कहा कि इन नेताओं का कुछ मुद्दों पर अरविंद केजरीवाल का विरोध करना महंगा पड़ गया।

शिवसेना के मुखपत्र सामना में केजरीवाल की आलोचना करते हुए कहा गया है कि आप में टकराव की घटना जनता पार्टी की याद दिलाती है। उस समय छोटी-छोटी पार्टियों से मिलकर बनी जनता पार्टी ने इंदिरा गांधी को हराकर केंद्र में सरकार बनाई थी। लेकिन जल्द ही विभिन्न मुद्दों को लेकर हुए विवाद ने पार्टी को खत्म कर दिया।

उस समय आपातकाल से आजिज लोगों को जनता पार्टी से बड़ी आशाएं थीं। ठीक इसी तर्ज पर अब आप भी जाती हुई लगती है। मुखपत्र में कहा गया है कि आखिर योगेंद्र और प्रशांत का क्या दोष है, उन्होंने बस कुछ मुद्दों पर केजरीवाल से असहमति जताई थी। आप और अन्य पार्टियों में अब क्या अंतर रह गया। दिल्ली की जनता ने बड़ी उम्मीदों से आप को सत्ता सौंपी थी।
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'सत्ता के नशे में चूर हैं केजरीवाल'

आम आदमी पार्टी के पूर्व विधायक हरीश खन्ना ने भी मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर तानाशाह होने का आरोप लगाया है। उनका दावा है कि केजरीवाल ने एक दिन के लिए विधायकों को बंधक बना लिया था। इससे उन्हें काफी दुख हुआ और दोबारा चुनाव लड़ने से मना कर दिया। खन्ना ने केजरीवाल पर सत्ता के नशे में चूर होने का आरोप लगाया है।

तिमारपुर से पूर्व विधायक हरीश खन्ना के मुताबिक, 8 सितंबर 2013 को विधायक दिनेश मोहनिया का एक स्टिंग केजरीवाल ने सार्वजनिक किया था। इसके जरिए उन्होंने भाजपा पर खरीद-फरोख्त का आरोप लगाया था। उसी दिन केजरीवाल ने सभी विधायकों को अकेले अपने घर बुलाया। मौके पर पहुंचने पर सभी विधायकों को बताया गया कि उपराज्यपाल से मिलकर भाजपा सरकार बनाने का दावा पेश कर सकती है। लिहाजा सभी विधायक उनके घर पर रहेंगे।

खन्ना का आरोप है कि एक दिन के लिए विधायकों को पूरी तरह बंधक बनाए रखा गया। किसी को घर से बाहर नहीं निकलने दिया। खन्ना ने बताया कि इससे साफ जाहिर हुआ कि केजरीवाल को अपने विधायकों पर यकीन नहीं है। अनुभव खासा दुखद रहा। इसके बाद दोबारा चुनाव न लड़ने का फैसला कर लिया।

दूसरे वाकये की जानकारी देते हुए खन्ना ने बताया कि 18 मई 2013 को केजरीवाल (इस्तीफा देने के बाद) ने पार्टी विधायकों को बैठक के लिए बुलाया। इसमें दोबारा सरकार बनाने के लिए जनता से बात करने सवाल उठा। इस पर पूर्व विधायक राजेश गर्ग और खुद खन्ना ने पूछा कि जनता से क्या पूछेंगे? जनता तो खुद पूछेगी कि हमसे पूछ कर सरकार छोड़ने का फैसला किया क्या? लेकिन वे बार-बार जनता के बीच जाने के लिए दबाव बना रहे थे। साफ लगा कि केजरीवाल सरकार बनाने का मन बना चुके थे। कांग्रेस हाईकमान ने भी उन्हें हरी झंडी दे दी थी। लेकिन प्रदेश कांग्रेस नेताओं ने इसमें अड़ंगा लगा दिया।

खन्ना का आरोप है कि केजरीवाल फिलहाल सत्ता के नशे में चूर हैं। उनका अहंकार बढ़ा हुआ है। यही वजह है कि वह पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के खिलाफ अपशब्द बोल रहे हैं। उन्होंने राजनीति की सारी मर्यादाएं ताक पर रख दी हैं। इसका जवाब जनता देगी।
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