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Delhi: पेट खराब या अपच की बीमारी, दूर होगी हर परेशानी; जानें क्यों होती है दिक्कत और कौन सा योग होगा फायदेमंद

Fri, 20 Jun 2025 09:45 PM IST
श्याम जी. राकेश शर्मा, नई दिल्ली

सार

बदलती जीवनशैली से बढ़ रही पेट की बीमारियों में योग प्रभावी साबित हुआ है, जो पाचन सुधारता, तनाव कम करता और आंतों को स्वस्थ रखता है। उचित आहार के साथ योगासन और प्राणायाम पेट के रोगों से राहत दिलाते हैं।
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योग - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बदलती जीवन शैली के बीच लोगों में तेजी से पेट से संबंधित रोग बढ़ रहे हैं। लंबे इलाज के बाद भी मरीजों को इससे राहत नहीं मिलती है, लेकिन ऐसे रोगों में योग फायदेमंद साबित हुआ है। पेट खराब हो या अपच की बीमारी हो योग हर परेशानी को दूर कर सकता है। यह खुलासा चौधरी ब्रह्मप्रकाश आयुर्वेद चरक संस्थान में मरीजों पर हुए विश्लेषण से हुआ है।

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संस्थान के स्वस्थवृत्त एवं योग विभाग में सहायक प्रोफेसर डॉ. जयसिंह यादव ने बताया कि दवाओं से रोग के लक्षणों पर काबू पाया जा सकता है, लेकिन जड़ से इलाज नहीं हो पाता। योग शरीर को उस लायक बनता है कि वह रोगों से लड़ सके। पेट की बीमारियों में योग मददगार है। यह पाचन को सुधार कर रक्त परिसंचरण को बढ़ाता है। पेट के अंगों को मजबूत कर तंत्रिका तंत्र को स्थिर करता है। मनुष्य की आंतें स्वस्थ रहेंगी तो पेट से जुड़े रोग दूर होंगे।

क्यों होती है दिक्कत?
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तनाव, नींद की कमी, व्यायाम का अभाव, अधिक खाना, अनियमित समय पर खाना, भोजन करने के तुरंत बाद बिस्तर पर चले जाना, संतुलित आहार न लेना, गर्म मसालों और तली हुई चीजों का अधिक उपयोग, मिलावटी व बासी खाद्य पदार्थ खाना, फास्ट-फ़ूड खाना आदि।
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ये हो सकती हैं समस्याएं
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अपच (अजीर्ण), उल्टी-दस्त, सिर दर्द, पेट दर्द, नींद की कमी, खट्टी डकार, पेट फूलना, गैस बनना, पेट में भारीपन, पेट व सीने में जलन, कब्ज।

यह योगासन होंगे फायदेमंद
- पवनमुक्तासन: यह फंसी हुई गैस को बाहर निकालने में मदद करता है। बड़ी आंत और छोटी आंत को उत्तेजित करता है। यह पेट का फूलना और अजीर्ण में भी उपयोगी है।
- वज्रासन: यह पाचन में मदद करता है। इससे एसिडिटी को कम कर सकते हैं। बेहतर पाचन क्रिया के लिए इसे भोजन के बाद करना चाहिए।
- अर्ध मत्स्येन्द्रासन: यह यकृत और अग्नाशय के कार्य में सुधार करता है। पाचन को उत्तेजित कर कब्ज को दूर करता है।
- भुजंगासन: पेट के अंगों को फैलाता है और रक्त प्रवाह में सुधार करता है। पित्ताशय और यकृत के कार्यों को संतुलित करता है। अम्लपित्त और सुस्त पाचन में उपयोगी है।
- धनुरासन: संपूर्ण पाचन तंत्र को सक्रिय करता है। पाचन, अवशोषण और उत्सर्जन को बढ़ाता है। आंतरिक अंगों की मालिश करता है।
- शलभासन: यह किडनी, लीवर, अग्नाश्य और पूरे उदर क्षेत्र को सक्रिय करता है। आंतरिक सक्रियता के कारण यह कब्ज, वायु विकार, अपच, और एसिडिटी को दूर करता है।
- पश्चिमोत्तानासन: यह आंतरिक अंगों, खासकर पाचन अंगों की मालिश करता है, कब्ज सहित पाचन समस्याओं से राहत देता है। यह आसन भूख न लगने, दस्त, आंतों के शूल आदि के लिए उपयोगी है, लेकिन कोलाइटिस में इसे करने से बचना चाहिए।
- प्राणायाम अभ्यास: श्वास तकनीक स्वायत्त तंत्रिका तंत्र को नियंत्रित करती है, चिंता को कम करती है और पाचन संतुलन को बहाल करती है।
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यह भी कारगर
. अनुलोम-विलोम: वात-पित्त-कफ को संतुलित कर मन को शांत करता है।
. भ्रामरी: तनाव से संबंधित, आंत संबंधी समस्याओं से राहत दिलाता है।
. शीतली/शीतकारी: पित्त को शांत करती है, हाइपरएसिडिटी में उपयोगी है।

योग के साथ जरूरी है उचित आहार
1.
सलाद, हरी सब्जियां और ताजे मौसमी फलों का सेवन करें।
2. रात को सोने से कम से कम दो घंटे पहले खाना खा लें।
3. अपनी क्षमता का लगभग 75 प्रतिशत से अधिक न खाएं।
4. भोजन के साथ छाछ का सेवन करे।
5. तले-भुने और मसालेदार भोजन से बचें।
6. लाल मिर्च, अचार, गरम मसाले, चटनी का उपयोग कम करें।
7. चाय या कॉफी का सेवन न करें या कम से कम करें।
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