यह योगासन होंगे फायदेमंद
- पवनमुक्तासन: यह फंसी हुई गैस को बाहर निकालने में मदद करता है। बड़ी आंत और छोटी आंत को उत्तेजित करता है। यह पेट का फूलना और अजीर्ण में भी उपयोगी है।
- वज्रासन: यह पाचन में मदद करता है। इससे एसिडिटी को कम कर सकते हैं। बेहतर पाचन क्रिया के लिए इसे भोजन के बाद करना चाहिए।
- अर्ध मत्स्येन्द्रासन: यह यकृत और अग्नाशय के कार्य में सुधार करता है। पाचन को उत्तेजित कर कब्ज को दूर करता है।
- भुजंगासन: पेट के अंगों को फैलाता है और रक्त प्रवाह में सुधार करता है। पित्ताशय और यकृत के कार्यों को संतुलित करता है। अम्लपित्त और सुस्त पाचन में उपयोगी है।
- धनुरासन: संपूर्ण पाचन तंत्र को सक्रिय करता है। पाचन, अवशोषण और उत्सर्जन को बढ़ाता है। आंतरिक अंगों की मालिश करता है।
- शलभासन: यह किडनी, लीवर, अग्नाश्य और पूरे उदर क्षेत्र को सक्रिय करता है। आंतरिक सक्रियता के कारण यह कब्ज, वायु विकार, अपच, और एसिडिटी को दूर करता है।
- पश्चिमोत्तानासन: यह आंतरिक अंगों, खासकर पाचन अंगों की मालिश करता है, कब्ज सहित पाचन समस्याओं से राहत देता है। यह आसन भूख न लगने, दस्त, आंतों के शूल आदि के लिए उपयोगी है, लेकिन कोलाइटिस में इसे करने से बचना चाहिए।
- प्राणायाम अभ्यास: श्वास तकनीक स्वायत्त तंत्रिका तंत्र को नियंत्रित करती है, चिंता को कम करती है और पाचन संतुलन को बहाल करती है।
यह भी कारगर
. अनुलोम-विलोम: वात-पित्त-कफ को संतुलित कर मन को शांत करता है।
. भ्रामरी: तनाव से संबंधित, आंत संबंधी समस्याओं से राहत दिलाता है।
. शीतली/शीतकारी: पित्त को शांत करती है, हाइपरएसिडिटी में उपयोगी है।
योग के साथ जरूरी है उचित आहार
1. सलाद, हरी सब्जियां और ताजे मौसमी फलों का सेवन करें।
2. रात को सोने से कम से कम दो घंटे पहले खाना खा लें।
3. अपनी क्षमता का लगभग 75 प्रतिशत से अधिक न खाएं।
4. भोजन के साथ छाछ का सेवन करे।
5. तले-भुने और मसालेदार भोजन से बचें।
6. लाल मिर्च, अचार, गरम मसाले, चटनी का उपयोग कम करें।
7. चाय या कॉफी का सेवन न करें या कम से कम करें।