टेरर फंडिंग केस में अलगाववादी नेता यासीन मलिक को बुधवार को दिल्ली की एक अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई। इसके बाद मलिक को तिहाड़ जेल भेज दिया गया। सजा सुनाए जाने से पहले भी मलिक तिहाड़ में ही बंद था। इस बीच गुरुवार को तिहाड़ प्रशासन की तरफ से बयान आया है कि यासीन मलिक को सख्त सुरक्षा के बीच अन्य कैदियों से अलग रखा गया है।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सुरक्षा के लिहाज से मलिक को जेल में कोई काम नहीं दिया गया है। उसे जेल नंबर सात में रखा गया है और समय-समय पर उसकी निगरानी की जा रही है।
अधिकारी ने यह भी जानकारी दी कि मलिक किसी पैरोल या फरलो का हकदार नहीं होगा क्योंकि वह आतंकी फंडिंग के मामले में दोषी है।
यासीन ने कबूला अपना जुर्म
बुधवार को अदालत ने टेरर फंडिंग मामले में दोषी ठहराए गए कश्मीरी अलगाववादी नेता यासीन मलिक को दोहरी उम्रकैद की सजा सुनाई है। अदालत ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) द्वारा मलिक को मृत्युदंड देने की मांग को खारिज कर दिया।
पटियाला हाउस स्थित विशेष न्यायाधीश प्रवीण सिंह ने खचाखच भरी अदालत में शाम 6 बजे के बाद सुनाए अपने फैसले में यासीन को दो धाराओं में उम्रकैद, एक में 10 वर्ष व एक में पांच वर्ष कैद की सजा सुनाते हुए उस पर जुर्माना भी लगाया है। अदालत के फैसले के अनुसार सभी सजा एक साथ चलेगी। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि दोषी ने स्वयं अपना अपराध कबूल किया है और उसे मृत्युदंड देने का कोई आधार नहीं है।