एनजीटी में दाखिल हलफनामे में कहा-सीवर लाइन मौजूद होने के बावजूद कई घरों ने पाइप सीधे नालों में डाले, डूसिब पर भी उठाए सवाल
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। यमुना नदी में बढ़ते प्रदूषण को लेकर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) में चल रही सुनवाई के दौरान दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) ने अपनी मुख्य सीवर व्यवस्था को लेकर सफाई दी है। बोर्ड ने हलफनामे में कहा कि उसकी सीवर प्रणाली सही तरीके से काम कर रही है और नालों के जरिए यमुना में गंदा पानी पहुंचने की प्रमुख वजह झुग्गी बस्तियों में किए गए अवैध सीवर कनेक्शन हैं।
डीजेबी के अनुसार, आरके पुरम स्थित नेहरू एकता कैंप और कुली कैंप जैसी बस्तियों में मुख्य सीवर लाइन पहले से बिछाई जा चुकी है और ज्यादातर घर इससे जुड़े हैं। हालांकि, नालों के किनारे बनी कुछ झुग्गियों के लोगों ने अपने शौचालयों के पाइप सीवर लाइन से जोड़ने के बजाय सीधे बरसाती नालों में डाल दिए हैं। इसी कारण गंदा पानी नालों के माध्यम से यमुना में पहुंच रहा है।
बोर्ड ने कहा कि निरीक्षण के दौरान नालों में गंदा पानी दिखाई देना सीवर व्यवस्था की विफलता का प्रमाण नहीं है, बल्कि यह अवैध कनेक्शनों का नतीजा है। डीजेबी ने इस मामले में दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड (डूसिब) की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। हलफनामे में कहा गया है कि एनजीटी के निर्देशों के अनुसार डूसिब को झुग्गी बस्तियों से निकलने वाले सीवेज को एक सिंगल डिस्चार्ज प्वाॅइंट पर एकत्र करना चाहिए, ताकि उसे सीवर नेटवर्क से जोड़ा जा सके। लेकिन नेहरू एकता कैंप में डूसिब ने चार अलग-अलग डिस्चार्ज प्वाॅइंट चिह्नित किए हैं। डीजेबी का कहना है कि इतनी कम मात्रा के सीवेज के लिए चार छोटे सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (डीएसटीपी) बनाना तकनीकी और व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है।
बोर्ड ने दावा किया कि यदि डूसिब एकल डिस्चार्ज प्वाॅइंट उपलब्ध कराए तो वह तुरंत उसे अपने सीवर नेटवर्क से जोड़ देगा। डीजेबी ने यह भी कहा कि कई बार पत्र लिखने और अनुरोध करने के बावजूद डूसिब ने आवश्यक कदम नहीं उठाए हैं, जिससे यमुना सफाई से जुड़े एनजीटी के आदेशों के पालन में देरी हो रही है। बोर्ड ने भरोसा दिलाया कि आवश्यक मंजूरियां और तकनीकी सुविधाएं मिलते ही शेष क्षेत्रों को भी सीवर नेटवर्क से जोड़ दिया जाएगा।