साइबर सिटी में 'जाम का झाम' खराब रोड इंजीनियरिंग का नतीजा है। दिल्ली-गुडग़ांव एक्सप्रेस-वे के डिजाइन में दूरदर्शिता का अभाव है। हर प्रवेश और निकासी पर खामियां है। बारिश के साथ ही एक्सप्रेस-वे की सभी खूबियां खत्म हो जाती है।
इसी का नतीजा है कि बृहस्पतिवार को हुई 48 मिलीमीटर (एमएम) बारिश के साथ मिलेनियम सिटी गुडग़ांव में 16 घंटे से अधिक तक 25 किलोमीटर लंबा जाम रहा। जो अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुर्खिया बन गई।
विशेषज्ञों की मानें तो गुडग़ांव-दिल्ली एक्सप्रेस-वे के महत्वपूर्ण प्रवेश और निकासी प्वाइंट के विस्तार की जरूरत है। एक्सप्रेस-वे के महत्वपूर्ण प्वाइंट इफ्को चौक, शंकर चौक, सिग्नेचर टावर, राजीव चौक की री-डिजाइनिंग और बदलाव के साथ जाम के झाम को खत्म किया जा सकता है। एक्सप्रेस-वे के 19 प्रवेश और 17 निकासी प्वाइंट के चौड़ीकरण की सख्त जरूरत है।
डिजाइन करते हुए लोकल और अर्बन ट्रैफिक को ध्यान में नहीं रखा
jam in gurgaon
- फोटो : अमर उजाला
मानेसर अर्बन मोबिलिटी प्लान-2010 में कहा गया था कि एक्सप्रेस-वे के निकासी और प्रवेश प्वाइंट पर कम चौड़ाई के कारण पीक आवर में अधिक गाडिय़ों की वजह से जाम के लिए चेताया गया था। ट्रांसपोर्ट एक्सपर्ट चेतन बंसल कहते हैं कि एक्सप्रेस-वे के डिजाइन में खामी है।
डिजाइन करते हुए लोकल और अर्बन ट्रैफिक को ध्यान में नहीं रखा गया। जबकि यहां प्रति घंटे 15 हजार गाडिय़ां दौड़ती है। एक्सप्रेस-वे पर चढने और उतरने वाली सर्विस लेन की चौड़ाई सिंगल व्हीकल के लिए है। जबकि यहां तीन की जरूरत है।
राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के एक इंजीनियर का कहना है कि जब एक्सप्रेस-वे डिजाइन किया गया था, तो उस समय होंडा चौक पर फ्लाईओवर प्रस्तावित था, लेकिन यह बाद में निकाल दिया गया।
पानी जमा होने पर मिट्टी ढंसने की डर से सिंगल लेन कर दिया जाता है
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- फोटो : अमर उजाला
अगर शुरुआत दौर में ही वहां फ्लाईओवर का निर्माण हो जाता तो आज यह नौबत नहीं आता। होंडा चौक का क्षेत्र लो-लेन एरिया है। मुख्य सड़क पर के अलावा यहां सर्विस लेन बना दिया गया, जिसकी वजह से यहां हमेशा पानी जमा हो जाता है।
उस समय इस क्षेत्र को उठाने का कोई प्रयास नहीं किया गया। जिसकी वजह से पानी जमा हो जाता है। पानी जमा होने पर मिट्टी ढंसने की डर से सिंगल लेन कर दिया जाता है। इस वजह से यहां जाम होना लाजिमी है।
पीडब्ल्यूडी के कई प्रोजेक्ट के निदेशक रह चुके सेवा राम कहते हैं एक्सप्रेस-वे का डिजाइन के वक्त आर्किटेक्चर गुडग़ांव के विकास को ध्यान में रखते हुए ट्रैफिक समस्याओं को भांप नहीं पाया। राजीव चौक और खेड़की दौला इंस्टीट्यूशनल और औद्योगिक क्षेत्र है। जो सीधे सर्विस लेन के जरिये एक्सप्रेस-वे को पहुंचती है, लेकिन जगह नहीं होने के कारण यहां चौड़ीकरण की अब गुंजाइश कम है। इसका वैकल्पिक इंतजाम सोचना होगा।