सूरज की किरणों के साथ दुर्लभ औषधि विषनाग के जरिए सफेद दाग (ल्यूकोडर्मा) को रोकने में बड़ी कामयाबी मिली है। रक्षा अनुसंधान विकास संस्थान (डीआरडीओ) के वैज्ञानिकों ने विषनाग सहित अन्य जड़ी बूटियों के मिश्रण से ल्यूकोस्किन दवा को तैयार किया था जिसके अब सफल परिणाम सामने आ चुके हैं।
अब तक देश के करीब डेढ़ लाख मरीज पंजीकृत हो चुके हैं जिनमें 75 फीसदी तक स्वस्थ्य हो चुके हैं। इसमें विषनाग के अलावा कौंच, बाकुची, मंडूकपर्णी, एलोवेरा, तुलसी इत्यादि जड़ी बूटियां भी मिलकर सफेद दाग को रोकती हैं। विषनाग औषधि सूरज की किरणों की मदद से सफेद दाग को बढऩे से रोकने में प्रभावी है साथ ही इसे पूरी तरह से खत्म भी कर रही है।
हर वर्ष 25 जून को मनाए जाने वाले विश्व विटिलिगो दिवस पर भारतीय वैज्ञानिकों की इस सफलता के बारे में एमिल फॉर्मास्युटिकल के कार्यकारी निदेशक संचित शर्मा ने बताया कि विषनाग काफी दुर्लभ बूटी है। पहाड़ी इलाकों में करीब 5 से सात हजार फुट की ऊंचाई पर यह मिलती है।
इससे तैयार ल्यूकोस्किन को लगाने के बाद सुबह और शाम 10-10 मिनट सूरज की किरणों में बैठने की सलाह दी जाती है, क्योंकि सुबह की धूप से त्वचा को नुकसान भी कम होता है। साथ ही विटामिन भी शरीर को मिलते हैं। उन्होंने बताया कि अब तक डेढ़ लाख मरीज पंजीकृत हो चुके हैं जिनमें से 70 से 75 फीसदी तक मरीजों में इसके सफल परिणाम मिले हैं।
वहीं रक्षा संस्थान जैव-ऊर्जा अनुसंधान संस्थान (डीआईबीईआर) के वैज्ञानिक डॉ. हेमंत कुमार पांडेय ने बताया कि अंतरराष्टï्रीय स्तर पर ल्यूकोस्किन की काफी सराहना हो चुकी है। काफी मरीजों को इससे फायदा हो रहा है। इसे लेकर और भी अध्ययन चल रहे हैं।
उन्होंने बताया कि देश में 4 से 5 फीसदी लोगों में सफेद दाग की परेशानी देखने को मिलती है। जबकि विश्व स्तर पर यह आंकड़ा करीब 1 से दो फीसदी है। चूंकि सफेद दाग को लेकर देश में सामाजिक भ्रांतियां और मानसिक वेदना भी बहुत है। इसका इस्तेमाल आसान बनाने के लिए पीने और लगाने (ओरल व क्रीम) दो स्वरूप दिए हैं। उन्होंने बताया कि इसकी ओरल (पीने की खुराक) का असर इम्युनिटी (रोग प्रतिरोधक क्षमता) को बढ़ाने में भी मिला है। बुखार, सर्दी, फ्लू इत्यादि के लक्षण मरीजों में नहीं मिले हैं।