जिंदगी अनमोल है और बड़ी मुश्किल से मिलती है। सोचिए, आपको इस दुनिया में लाने के लिए आपकी मां ने असहनीय प्रसव पीड़ा सही और आपका चेहरा देखते ही वह अपना दर्द भूल गई। इसलिए जब भी मन में नकारात्मक या खुदकुशी का ख्याल आए, उन लोगों को याद कीजिए जिन्हें आपके न रहने से गहरा फर्क पड़ेगा।
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के 2022 के आंकड़ों का हवाला देते हुए मनोचिकित्सक डॉ. ओम प्रकाश बताते हैं कि देश में सुसाइड के सबसे सामान्य कारण पारिवारिक समस्याएं, वैवाहिक तनाव, नशे की लत, मानसिक रोग, बेरोजगारी और परीक्षा में असफलता हैं।
अन्य कारणों में सामाजिक बहिष्कार, सम्मान की हानि, घरेलू हिंसा, वित्तीय तनाव और साइबर उत्पीड़न भी शामिल हैं।आंकड़ों के अनुसार, खुदकुशी करने वालों में 15 से 39 वर्ष की आयु के छात्र, गृहणियां और बेरोजगार युवा सबसे अधिक हैं। अकेले दिल्ली में वर्ष 2022 में 3,417 सुसाइड दर्ज हुए। विशेषज्ञों का कहना है कि खुदकुशी का विचार अचानक नहीं आता, बल्कि यह मानसिक बीमारियों जैसे डिप्रेशन, बाइपोलर डिसऑर्डर और स्किजोफ्रेनिया की स्थिति में गहराता है।
मनोचिकित्सकों की सलाह है कि यदि कोई व्यक्ति असामान्य रूप से नकारात्मक सोचने लगे, जीवन से निराश दिखे या अलग-थलग पड़ जाए, तो परिवार व मित्र तुरंत उसका विशेष ध्यान रखें और डॉक्टर से परामर्श कराएं। शुरुआती स्तर पर मदद और भावनात्मक सहयोग कई जिंदगियां बचा सकता है।
मानसिक तनाव के लिए हेल्पलाइन है उपलब्ध
वर्ष 2022 में केंद्र सरकार ने टेलीमानसिक स्वास्थ्य हेल्पलाइन नंबर 14416 और 18008914416 शुरू की। यह सेवा 24x7 टोल फ्री उपलब्ध है। मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के लिए प्रशिक्षित परामर्शदाता, मनोवैज्ञानिक और मनोचिकित्सकों द्वारा सहायता प्रदान करती है। अब तक 30 लाख से अधिक कॉल प्राप्त कर चुकी है।