बदलती जीवनशैली और भागदौड़ भरी जिंदगी के बीच नींद की कमी लोगों को रोगी बना रही है। तकनीकी युग में मोबाइल और कंप्यूटर का अधिक इस्तेमाल लोगों के जीवन पर दुष्प्रभाव डाल रहा है। इस लत के कारण पर्याप्त नींद की कमी से युवा तेजी से बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि यदि स्वस्थ जीवन बिताना है तो प्रतिदिन 8 घंटे की नींद जरूरी है।
नागरिक अस्पताल के मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. अजीत दिवान ने बताया कि बच्चा हो या बूढ़ा, आज कल हर कोई नींद की बीमारी से ग्रस्त है। ओपीडी में रोजाना 20 मरीज अनिद्रा से पीड़ित पहुंच रहे हैं। 16 से 30 वर्ष तक के युवा इस बीमारी से सबसे अधिक ग्रस्त पहुंच रहे हैं। कोई वीडियो गेम की लत तो कोई काम के तनाव में पर्याप्त नींद नहीं ले पा रहा।
जिसके कारण तमाम बीमारियां उन्हें अपनी गिरफ्त में ले रही हैं। युवाओं के अलावा बड़ों में भी बढ़ रही सोशल मीडिया की लत अनिद्रा का कारण बन रही है। नींद के लिए दवाओं का निरंतर उपयोग व्यक्ति को अंदर से खोखला कर रहा है। पर्याप्त नींद ही इसका एक मात्र उपाय व उपचार है।
प्रजनन पर भी असर कर रही अनिद्रा
इंदिरा आईवीएफ अस्पताल की डॉ. निधि सलूजा ने बताया कि नींद का पुरुषों की प्रजनन क्षमता पर प्रभाव पड़ता है। टेस्टोस्टेरॉन पुरुष हार्मोन है, जो प्रजनन के लिए महत्वपूर्ण है। पुरुषों में हर दिन जितनी मात्रा में टेस्टोस्टेरॉन रिलीज होता है, उसकी अधिक मात्रा नींद में ही रिलीज होती है। नींद पूरी न होने के कारण यह मात्रा भी कम हो रही है। जिसका सीधा असर प्रजनन पर पड़ रहा है।