खानपान और खराब जीवन शैली बढ़ा रही समस्या
एम्स के मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर डॉ. नवल के विक्रम ने कहा कि खराब जीवन शैली, खान पान के कारण मोटापे की समस्याएं तेजी से बढ़ी है। खासकर कोरोना महामारी के बाद इसका प्रकोप हर आयु वर्ग पर दिखा है। युवाओं के लंबे समय तक बैठकर काम करने, शारीरिक गतिविधि का अभाव, फास्ट फूड का सेवन सहित दूसरे कारक इन समस्याओं को गंभीर बना रहे हैं। वहीं, बच्चों में वातावरण, माता-पिता से मिले जीन, खेलने से बचना सहित दूसरे कारणों के कारण मोटापा बढ़ा है।
सर्जरी अंतिम विकल्प
बैरिएट्रिक सर्जन डॉ. सचिन अंबेकर ने कहा कि मोटापा को दूर करने के लिए बैरिएट्रिक सर्जरी अंतिम विकल्प है। यह सर्जरी करने से पहले मरीज की जांच करनी पड़ती है। उसकी बीएमआई सहित दूसरे की जांच करते हैं। सर्जरी होने के बाद भी मरीज को कुछ नियमों का पालन करना पड़ता है। यदि व लापरवाही करता है तो फिर से मोटापे का शिकार हो सकता है।
देशी भोजन दे सकता है राहत
मोटापे से राहत में देशी भोजन राहत दे सकता है। जिस क्षेत्र में रहते हैं उस क्षेत्र में उगने वाला अन्न उक्त वातावरण के अनुसार होता है। उसमें पर्याप्त प्रोटिन होता है जो शरीर के लिए जरूरी है। लेकिन मौजूदा समय में पश्चिमी खान-पान से शरीर का संतुलन खराब कर दिया है। मोटा अनाज सहित दूसरे कारकों से स्थिति को सुधार सकते हैं। वहीं मोटापे को कम करने के लिए बिना डॉक्टर की सलाह के भोजन छोड़ना उचित विकल्प नहीं है।