क्या आपने कभी पैरों के अटैक के बारे में सुना है? यदि नहीं तो ध्यान दीजिए। पैरों को भी दिल की तरह अटैक आता है। मरीज को न सिर्फ दिव्यांगता का शिकार होना पड़ सकता है बल्कि, उसका रोजमर्रा का जीवन भी संकट में आ जाता है। बृहस्पतिवार को मेदांता अस्पताल के विशेषज्ञों ने नई दिल्ली के होटल अशोक में आयोजित सम्मेलन में ये जानकारी दी। विशेषज्ञ वरिष्ठ डॉ. राजीव पारिख ने बताया कि तंबाकू का सेवन जिस तरह दिल के अटैक को न्योता देता है।
ठीक उसी तरह इससे नसों में थक्का जमने के कारण पैरों का अटैक भी आ सकता है। पैरों में खून का थक्का ना जमने पाए, इसके लिए लोगों को काफी ध्यान रखना चाहिए। अगर कोई व्यक्ति लंबी यात्रा कर रहा है तो लगातार बैठने से भी थक्का जम सकता है। इसलिए यात्रा के दौरान बार-बार पैरों को हिलाते रहना चाहिए। उन्होंने बताया कि नियमित 40 मिनट का व्यायाम और तंबाकू से परहेज ही इससे बचा सकता है। पैरों की पिंडली में चलने के दौरान दर्द का होना, पैरों के जख्म नहीं भरना, बार-बार पैर सो जाना आदि इसके लक्षण हैं। डॉ राजीव ने बताया कि यदि अचानक पैर ठंडा पड़ने लगे तो गर्म पानी से सिकाई ना करें। इससे और नुकसान हो सकता है।
तंबाकू नियंत्रण के लिए आईएमए ने चलाया जागरूकता अभियान
विश्व तंबाकू दिवस की पूर्व संध्या पर इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने देशभर में तंबाकू नियंत्रण के लिए जागरूकता अभियान शुरू किया। इसके लिए देशभर में आईएमए की शाखाओं में कार्यशालाएं वर्षभर आयोजित की जाएंगी। आईएमए के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉक्टर सांतनू सेन ने बताया कि भारत में हर तरह के इलेक्ट्रोनिक निकोटीन सिस्टम (ईएनडीएस) को पूरी तरह से बैन करने के लिए केंद्र सरकार की हालिया एडवाइजरी के बाद भी बड़े शहरों में ई-सिगरेट और हुक्का आसानी से उपलब्ध हैं। कई फ्लेवर्स में उपलब्ध और ट्रेंडी होने के कारण यह कई युवाओं और गैर-धूम्रपान करने वालों के बीच लोकप्रिय हो रहा है। आईएमए ने अपनी केंद्रीय कार्य समिति की बैठक में हाल ही में ईएनडीएस के रूप में लोकप्रिय ई-सिगरेट के उपयोग का विरोध करने का फैसला किया।