जेएनयू विवाद में देशद्रोह के मु्ख्य आरोपी उमर खालिद व अन्य 4 आरोपियों के वापस जेएनयू कैंपस आ जाने के बाद से ही दिल्ली पुलिस कैंपस के बाहर खड़ी और आरोपियों को गिरफ्तार करने के लिए जेएनयू वीसी के फैसले का इंतजार कर रही है।
इस मामले में दिल्ली के पुलिस कमिश्नर बीएस बस्सी ने कहा कि आरोपियों को जांच में सहयोग करना चाहिए। अगर वो बेगुनाह हैं तो उन्हें अपनी बेगुनाही का सबूत पुलिस को देना चाहिए।
वहीं पुलिस कमिश्नर ने ये भी कहा कि पुलिस के पास कैंपस के अंदर घुसने के कई विकल्प मौजूद हैं और पुलिस कभी भी जेएनयू में घुस सकती है।
उन्होंने आगे कहा कि पुलिस के जाने से माहौल शांत होता है न कि खराब। बस्सी बोले कि उन्हें अपनी टीम पर पूरा भरोसा है कि वो इस मामले से जुड़े हर मुद्दे पर सही कदम उठाने में समर्थ हैं।
JNU शिक्षक संघः पुलिस को न मिले कैंपस में घुसने की इजाजत
वहीं इससे पहले जेएनयू के शिक्षक संघ के अध्यक्ष अजय पटनायक ने कहा कि इस मामले में आंतरिक जांच की जानी चाहिए और पुलिस को कैंपस में घुसने की इजाजत नहीं देनी चाहिए।
पटनायक ने कहा कि जेएनयू प्रशासन को पुलिस को विश्वविद्यालय के अंदर घुसकर किसी को गिरफ्तार करने की इजाजत नहीं देनी चाहिए और छात्रों पर लगे आपराधिक षड्यंत्र व राष्ट्रद्रोह जैसे सभी आरोप हटा लिए जाने चाहिए।
पटनायक ने ये भी कहा कि वह वीसी से मिलकर मांग करेंगे कि छात्रों के खिलाफ कोई भी आरोप न लगाए जाएं। वहीं राष्ट्रद्रोह के आरोप में गायब चल रहे और कल ही कैंपस लौटे जेएनयू छात्र रामा नागा ने कहा कि उसे वीसी का हर फैसला मंजूर होगा।
'जेएनयू प्रोफेसर ने छिपाया था आरोपियों को'
रामा नागा से जब पूछा गया कि आपने 9 फरवरी को देशद्रोही नारे लगाए थे या नहीं तो उसने कहा कि कुछ लोग जो जेएनयू के बाहर के थे उन्होंने देशविरोधी नारे लगाए। हमने तो उन्हें वहां से जाने के लिए कहा था और इस बारे में शिकायत भी की थी।
उसने ये भी कहा कि पुलिस यहां आ सकती है, हम यहीं हैं और पुलिस की मदद भी करेंगे। दूसरी तरफ एक अन्य आरोपी छात्र अनंत ने वीसी को कड़ा रुख अपनाने को कहा।
अनंत ने कहा कि वीसी को साहसिक स्टैंड लेना चाहिए। उन्हें सभी आरोपों को खारिज कर रजिस्ट्रार को हटा देना चाहिए।
आज ही बीजेपी नेता रामेश्वर चौरसिया ने आरोपी जेएनयू छात्रों के बारे में कहा कि उन्हें जेएनयू के एक प्रोफेसर ने ही कैंपस में छिपा कर रखा था। जब उनसे पूछा गया कि वो प्रोफेसर कौन है तो उन्होंने नाम नहीं बताया और कहा कि आरोपी छात्रों ने खुद ही कहा कि वो इतने दिनों कैंपस में ही रहे।
जबकि सच ये है कि छात्रों ने अपने बयान में कहा कि वो माहौल शांत होने का इंतजार कर रहे थे और कैंपस के आस-पास ही थे। वहीं दूसरी तरफ एबीवीपी ने आरोपी पांचों छात्रों के लौटने को एक पूर्वनियोजित साजिश करार दिया और कहा कि कल कुछ वामपंथी संगठन आरोपी छात्रों के साथ खड़े दिखे।