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11 से 13 मार्च तक होना है वर्ल्ड क्लचरल फेस्टिवल

Thu, 18 Feb 2016 05:53 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
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राष्ट्रीय राजधानी में आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन की ओर से आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर के नेतृत्व में 11 से 13 मार्च तक प्रस्तावित वर्ल्ड क्ल्चर फेस्टिवल से संबधित जांच रिपोर्ट दिल्ली विकास प्राधिकरण की ओर से नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल (एनजीटी) में दाखिल कर दी गई है।
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इस रिपोर्ट में कहा गया है कि कार्यक्रम के लिए की जा रही तैयारियों में किसी तरह से आदेश का उल्लंघन नहीं किया जा रहा। साथ ही यमुना और डूब क्षेत्र को किसी भी तरह से नुकसान नहीं पहुंचाया जा रहा।

16 फरवरी को डीडीए, आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन व अन्य अधिकारियों की ओर से कार्यक्रम स्थल की जांच की गई। इस दौरान जांच टीम ने अपनी रिपोर्ट में इसे क्लीन चिट दे दी है। मामले की अगली सुनवाई 19 फरवरी को होगी।
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जस्टिस स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली पीठ ने बुधवार को यमुना जिए अभियान के संयोजक मनोज मिश्रा के मामले पर सुनवाई की। बेंच ने कार्यक्रम आयोजकों की ओर से पेश वकील से कहा कि वह कार्यक्रम का पूरा ब्योरा अगली सुनवाई में पेश करें।

याची ने फाउंडेशन पर आरोप लगाया था कि कार्यक्रम के लिए यमुना डूब क्षेत्र में निर्माण कार्य कर रहा है। इसके बाद ग्रीन पैनल ने प्राधिकरणों को साइट का दौरा कर स्टेटस रिपोर्ट ट्रिब्युनल के समक्ष पेश करने का निर्देश दिया था।

ये हैं जांच रिपोर्ट के तथ्य
बारापुला फ्लाईओवर के पास सन डायल की ओर से कार्यक्रम स्थल में प्रवेश कर जांच की गई। इसमें आर्ट ऑफ लिविंग की ओर से कार्यक्रम निदेशक गौतम विज, प्रोफेसर एके गोसांई व डीडीए के अधिकारी मौजूद रहे। जांच टीम ने कहा कि कार्यक्रम स्थल यमुना से 200 मीटर की दूरी पर है। यमुना पर एक पैंटून ब्रिज बनाया गया है और दूसरा बनाया जाना है। किसी भी तरह की खुदाई नहीं की जा रही है।

साथ ही व्यक्ति विकास केंद्र की ओर से मौजूद प्रतिनिधि ने जांच टीम को बताया कि 500 टन मलबा-कचरा कार्यक्रम स्थल से हटाया गया है। कार्यक्रम के लिए 13 प्रवेश द्वार बनाए जाने हैं। पूरे कार्यक्रम स्थल के लिए 1200 फीट लंबी और 250 फीट चौड़ी जमीन को अस्थायी तरीके से इस्तेमाल किया जा रहा है। इसके अलावा साक्ष्य के तौर पर ट्रिब्युनल में तस्वीरें भी पेश की गई हैं।

कार्यक्रम के खिलाफ एक और याचिका
यमुना से संबंधित आदेशों का उल्लंघन करने के लिए कार्यक्रम के खिलाफ एक और याचिका एनजीटी में दाखिल की गई है। एनजीटी ने संबंधित प्राधिकरणों को नोटिस दिया है। साथ ही पूछा है कि कार्यक्रम स्थल का कितना इलाका यमुना डूब क्षेत्र में आता है, वे स्पष्ट तौर पर अगली सुनवाई में बताएं।

मामले की अगली सुनवाई 19 फरवरी को होगी। मालूम हो कि एनजीटी ने बीते वर्ष अपने विस्तृत आदेश में यमुना के डूब क्षेत्र में किसी भी तरह के निर्माण पर प्रतिबंध लगा दिया था। साथ ही यमुना के पुनरुद्धार के लिए बनाई गई प्रधान समिति को डूब क्षेत्र में अवैध निर्माण को चिह्नित कर नष्ट करने का निर्देश दिया था।
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