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विश्व कैंसर दिवस आज: एम्स में आधे से ज्यादा कैंसर मरीज दिल्ली और यूपी से

Mon, 04 Feb 2019 12:05 AM IST
Vikas Kumar परीक्षित निर्भय, नई दिल्ली
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World Cancer Day
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सोमवार को मनाए जाने वाले विश्व कैंसर दिवस से पहले देश के सबसे बड़े चिकित्सीय संस्थान एम्स में कैंसर मरीजों को लेकर सामने आई भौगोलिक रिपोर्ट ने चौंका दिया है। पिछले दो वर्ष में दिल्ली और यूपी से सबसे ज्यादा मरीज इलाज के लिए पहुंचे हैं। डॉक्टरों का दावा है कि एम्स में आने वाले 50 फीसदी से ज्यादा कैंसर मरीज इन्हीं दो राज्यों से हैं। 

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एम्स की 62वीं वार्षिक रिपोर्ट का उद्देश्य कैंसर की राज्यवार स्थिति पता कर स्थानीय स्तर पर चिकित्सा के ठोस कदम उठाए जाना है। रिपोर्ट के अनुसार हर साल एम्स में करीब 320 मरीजों की बीमारी से मौत हो रही है। एम्स के डॉक्टरों के मुताबिक उत्तराखंड में भी कैंसर तेजी से फैल रहा है। दो वर्षों में अकेले उत्तराखंड से ही करीब 700 मरीज एम्स पहुंचे हैं।

उत्तराखंड में कैंसर फैलने से डॉक्टर भी चिंतित हैं। इनका मानना है कि शुद्ध वातावरण के बावजूद वहां बढ़ते कैंसर की वजह जानने के लिए अलग से रिसर्च होना चाहिए। रिपोर्ट के मुताबिक हरियाणा से ज्यादातर मरीज नाजुक हालत में एम्स पहुंच रहे हैं। डॉक्टरों की मानें तो झज्जर के बाढ़सा में कैंसर संस्थान शुरू होने के बाद इन मरीजों को अब समय पर उपचार मिल सकता है।  

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एम्स आने वाले मरीजों का भौगोलिक विवरण
राज्य    2016        2017       
दिल्ली    3960    4100      
यूपी    3731    4125      
बिहार    1699    1914      
हरियाणा    1369    1389      
उत्तराखंड    339    385      

पिछले दो साल में एम्स में कैंसर की स्थिति 
- 2016 में एम्स में कैंसर मरीजों की ओपीडी 1,46,688      
- 2016 में कैंसर के नए मरीज 12372      
- 2017 में एम्स में कैंसर मरीजों की ओपीडी 1,71,778      
- 2017 में कैंसर के नए मरीज 13261      

एम्स में सबसे ज्यादा मृत्युदर कैंसर की      
एम्स में करीब 42 विभाग और 7 केंद्र संचालित हैं। इनमें हर वर्ष 35 से 40 लाख मरीजों को उपचार दिया जा रहा है। इन सभी विभागों में भर्ती मरीजों की औसत मृत्युदर सर्वाधिक कैंसर की है। 2017-18 के दौरान कैंसर मरीजों की मृत्यु दर 25 फीसदी दर्ज की है। जबकि पूरे संस्थान की औसत मृत्युदर 1.8 फीसदी देखी गई है।  
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एम्स में कीमो लेने वाले आधे मरीज बच्चे      
एम्स में कैंसर से बचने के लिए कीमोथैरेपी लेने वाले मरीजों में सबसे ज्यादा संख्या बच्चों की है। आंकड़ों के अनुसार साल 2016 में 14034 और 2017 में 16,357 मरीजों को कीमोथैरेपी दी गई। इनमें से बच्चों की संख्या क्रमश: 8198 और 8603 संख्या रही है। एम्स के वरिष्ठ कैंसर विशेषज्ञ का कहना है कि बच्चों में कैंसर के मामले बढ़े हैं। कम उम्र में सर्जरी नहीं की जा सकती। इसलिए कीमो में बच्चे ज्यादा हैं।       

नेपाल के कैंसर का इलाज कर रहा एम्स      
एम्स में पड़ोसी देशों के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। इनमें सर्वाधिक नेपाल के कैंसर मरीज शामिल हैं। पिछले दो वर्ष में एम्स में नेपाल के 90, अफगानिस्तान के 12 और बांग्लादेश के 8 कैंसर पीड़ित भर्ती हुए हैं।       

फेफड़ों में कैंसर के मरीज भी बढ़े      
एम्स के वरिष्ठ डॉक्टर ने बताया कि पिछले कुछ वर्ष में फेफड़ों के कैंसर में तेजी आई है। एम्स में इस समय 2653 कैंसर मरीजों का उपचार चल रहा है। उन्होंने बताया कि सालाना 450 से ज्यादा नए कैंसर मरीज अकेले एम्स में ही दर्ज हो रहे हैं। वहीं दिल्ली कैंसर रजिस्ट्री के अनुसार देश की राजधानी के पुरुषों में फेफड़ों, जीभ और पौरुष ग्रंथि का कैंसर और महिलाओं में स्तन, गर्भाश्य और अंडाश्य कैंसर ज्यादा है।
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