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विश्व पुस्तक मेला: बिगड़ती आबोहवा को क्या किताबें बचाएंगी 

Sun, 07 Jan 2018 05:07 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
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विश्व पुस्तक मेला - फोटो : जी पॉल
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पर्यावरण बिगड़ रहा है। ग्लोबल वार्मिंग पर विशेषज्ञ शोध कर रहे हैं। जलवायु में रोज नये परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। चिंता इतनी है कि इस बार दिल्ली में आयोजित होने वाले 'विश्व पुस्तक मेले' की थीम भी पर्यावरण आधारित है। किताबी दुनिया के जरिये ही सही, एक संदेश देने की कोशिश की जा रही है कि संभल जाइए, कहीं देर न हो जाए।
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दिल्ली में हर साल अंतर्राष्ट्रीय पुस्तक मेला आयोजित होता है। देश और दुनिया के हजारों लोग इस मेले में भाग लेते हैं और लाखों लोग इस मेले को देखने पहुंचते हैं। किताबों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से एक सशक्त संदेश देने की कोशिश भी की जाती है।

किताबों का यह मेला, हर बार कुछ न कुछ संदेश तो दे ही जाता है। यहां पहुंचने वाले लाखों लोगों में से अगर हजारों ने भी इस संदेश को गंभीरता से समझा और अपनाया, तो आयोजन सफल हो जाता है। इस बार विश्व पुस्तक मेले के जरिये कोशिश की गई है, पर्यावरण को बचाने की। यह कोशिश यूं ही नहीं की गई है।
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दिल्ली-एनसीआर की बिगड़ती आबोहवा ने सबकी चिंता बढ़ा दी है, तो किताबों का मेला ही क्यों इससे दूर रहे। इस बार के 'विश्व पुस्तक मेला' में पर्यावरण को बचाने संबंधी जागरूकता को फैलाने की पूरी तैयारी की गई है। पुस्तक मेले की थीम भी पर्यावरण संरक्षण व जलवायु परिवर्तन है।

हर साल की तरह इस साल भी सांस्कृतिक कार्यक्रम, गीत संगीत, परिचर्चा आदि होंगी, लेकिन यह कार्यक्रम कहीं न कहीं पर्यावरण बचाने पर जोर देते नजर आएंगे। पर्यावरण को बचाने के लिए धर्म का सहारा भी इस पुस्तक मेले में लिया गया है।

गुरु ग्रंथ साहिब में वर्णित पर्यावरण एवं प्रकृति से जुडे़ शबद गायन के लिए पजांब एकेडमी, दिल्ली से सुनील सेजल और नेहा डोगरा की विशेष मंडली को आमंत्रित किया गया है। हाल नंबर 7 में बनाया गया थीम मंडप पूरी तरह प्राकृतिक सामग्री से बना होगा।

थीम पेवेलियन में मंडप में भारतीय भाषाओं में छपी पर्यावरण संरक्षण व जलवायु परिवर्तन आधारित पुस्तकों समेत पांच अन्य देशों की पुस्तकों को प्रदर्शित भी किया जा रहा है।

बेल्जियम, चीन, कनाडा, डेनमार्क, मिस्र, फ्रांस, जर्मनी, हंगरी, ईरान, इटली, मैक्सिको, नेपाल, पाकिस्तान, पोलैंड, स्लोवेनिया, स्पेन, श्रीलंका, स्वीडन, संयुक्त अरब अमीरात, यूनाइटेड किंगडम सहित 40 देशों के प्रकाशक इस मेले में भाग ले रहे हैं। इसके अलावा यूनेस्को आदि अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां भी शिरकत करेंगी।

मेले में जलवायु परिवर्तन पर इंटरनेशल इवेंट कॉर्नर में यूरोप और भारत के बीच जलवायु नीति पर चर्चा होगी। बच्चों के कॉर्नर में ग्राफिक कार्यशाला में 'मैं भी एक पर्यावरणविद हूं' पर कार्यशाला आयोजित होगी।

इसी कॉर्नर में अपशिष्ट प्रबंधन पर चर्चा होगी और हंगरी के चित्रकार सिस्ला गेवै बच्चों के बीच ड्राइंग प्रतियोगिता आयोजित करेंगे। यूरोपिय संघ मंडल द्वारा जलवायु परिवर्तन, पर्यावरण, पानी आदि क्षेत्र पर पैनल चर्चा की जाएगी।

थीम पेवेलियन में कविता द्विवेदी एंड ग्रुप द्वारा 'जय मां यमुने' पर ओडिसी नृत्य प्रस्तुति किया जाएगा। केंद्रीय हिंदी संस्‍थान द्वारा पर्यावरण पर नाटक मंचन होगा। सूचना एंव पर्यावरण मंत्रालय के गीत एवं नाटक डिविजन द्वारा पर्यावरण संबंधी विषयों पर गीत एवं नाटक प्रस्तुत किए जाएंगे।

नेशनल मिशन ऑफ मेनुस्क्रिप्ट दिल्ली द्वारा पर्यावरण पर वैदिक गीतों की प्रस्तुति दी जाएगी। थीम पेवेलियन में प्रकृति और पर्यावरण से जुडे़ संस्कृत के मंत्र गायन कार्यक्रम भी रखा गया है।

पर्यावरण संरक्षण पर सिंधी भाषा में  शाह अब्दुल लतीफ द्वारा कविता मंचन, देवी दुर्गा कथक संस्‍थान, नेशनल प्रमोशन ऑफ सिंधी लैंग्वेज द्वारा सिंधी भाषा में कथक मंचन कार्यक्रम भी आयोजित होगा।

कामख्या नृत्य मंडल, दिल्ली द्वारा जलवायु परिवर्तन व पर्यावरण संरक्षण पर नृत्य प्रस्तुत किए जाएगा। लोक गायिका मालिनी अवस्‍थी व मशहूर नृत्यांगना सोनल मानसिंह प्रकृति में हो रहे बदलावों को रोकने के लिए अपने गीत व नृत्य के माध्यम से संदेश देती नजर आएंगी।

आशा पारेख और उनके ग्रुप द्वारा दिल्ली के पर्यावरण पर गुजराती में नुक्कड नाटक प्रस्तुत किया जाएगा। सेंटर फॉर स्टडीज ऑफ ट्रेडियन्स एंड सिस्टम्स द्वारा पर्यावरण से जुड़े मुद्दो पर सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

गुरुकुल दिल्ली के छात्रों द्वारा प्रकृति से जुड़े वैदिक मंत्रों का जाप किया जाएगा। पर्यावरण पर श्री कुमार वीर भूषण दिल्ली का ग्रुप नुक्कड नाटक का मंचन करेंगे। भारतीय दर्शन में प्राचीन काल से ही प्रकृति एवं पर्यावरण संरक्षण को लेकर जो कुछ लिखा गया है, उसे भी सूक्ति वाक्यों के रूप में मेला परिसर में जगह-जगह प्रदर्शित किया जाएगा।

अतिथि देश यूरोपियन यूनियन भी मेला थीम पर अपनी खास प्रस्तुति तैयार कर रहा है। ज्यादा से ज्यादा प्रचार करने के लिए मेले में जगह-जगह पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन के पोस्टर व बैनर भी प्रदर्शित किए जाएंगे।

थीम पेवेलियन में पर्यावरणविद् पदम श्री संत बलवीर सिंह सेचवाल, डॉ. मंजीत सिंह आदि विशेषज्ञ अपने विचार रखेंगे। वायु प्रदूषण पर  डी शाहा, पूनम गौर, विवेके मिश्रा, संजीव गुप्ता परिचर्चा करेंगे। पारंपरिक जल स्रोतों पर राम बहादुर राय, कुमार प्रशांत मनोज झा चर्चा करेंगे।

यूरोपीय संघ द्वारा जलवायु कूटनीति पर चर्चा होगी। जलवायु परिवर्तन पर आयोजित गोष्ठी में चंडीप्रसाद भट्ट, शेखर पाठक, सोपान जोशी, आदि भाग लेंगे। देश के विभिन्न राज्यों से आए पर्यावरणविद जिनमें कर्नाटक से जी कृष्‍ण प्रसाद, विश्वासी रॉय चौधरी पश्चिम बंगाल आदि भाग लेंगे।
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