स्टार टैलेंट मीडिया एकेडमी और विजन फिल्म्स एंड इंटरनेंमेंट के संयुक्त तत्वावधान में तीन दिवसीय कार्यशाला के विशेष सत्र का आयोजन किया गया, जिसमें प्रतिभागी युवाओं को स्टाइलिंग, मॉडलिंग, एक्टिंग और डायरेक्शन सीखने-सीखाने की आंतरिक कला को विकसित करने के गुर सिखाए गए। इसके साथ व्यक्तित्व विकास और कैमरे का सामना करने में हिचकिचाहट को दूर करने की बारीकियों से भी युवा प्रतिभागी रुबरू हुए।
हरियाणा के भिवानी से आए एक प्रतिभागी हितेश यादव की पुश्तैनी दुकान है, जिसे उनके पिताजी चलाते हैं। बॉक्सर रहे हितेश को जब बैक पेन की शिकायत हुई तो डॉक्टरों ने उन्हें बॉक्सिंग से दूर रहने की ताकीद कर दी। मगर हितेश ने हिम्मत नहीं हारी और अभिनय के क्षेत्र में जोर आजमाइश करने निकल पड़े।
इसी तरह आतंकवाद की समस्या को जूझ रहे राज्य जम्मू-कश्मीर स्थित किश्तवाड़ जिले के रहने वाले युवा राशिद इंजीनियरिंग में स्नातक हैं, जो स्क्रीन की दुनिया के जरिए अपने सूबे की उपस्थिति दर्ज कराना चाहते हैं।
हिमाचल प्रदेश के कालका से आए इंजीनियर मोहित शर्मा को मॉडलिंग का पैशन यहां खींच लाया तो चंडीगढ़ के निकट स्थित मोरिंडा के अंकित भाटिया के लिए ग्लैमर बड़ा सपना है, जिसे उनकी मां ने पहली बार दिखाया बना।
अब तो वे मां के सपने को साकार करने की ठान चुके हैं। अपनी कला को पेशेवर रंग देने की गरज से एकेडमी में आए फरीदाबाद के एक दिहाड़ी मजदूर के बेटे डेमिल से भी मुलाकात हुई। डेमिल बीते आठ साल से डांस कर रहे हैं और उन्हें अपने नजरिए पर पूरा भरोसा है।
डेमिल कहते हैं कि मायने नहीं रखता कि आप क्या हैं बल्कि आप नजरिया क्या है, यह अहम बात है। कार्यशाला में दिल्ली एनसीआर समेत उत्तर प्रदेश, बिहार, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर और पंजाब के कुल 15 प्रतिभागी युवाओं ने शिरकत की।
कार्यशाला का निर्देशन कर रहे एक्सपर्ट शिवा भारद्वाज ने बताया कि अभिनय के क्षेत्र में चुनौतियां बहुत हैं, मगर युवाओं उम्मीद करने के बजाय काम पर फोकस करना होगा। इस रास्ते से उनके भविष्य का दरवाजा अपने आप खुल जाएगा।
शिवा की टीम में उनके युवा साथी प्रेरणा, योगी, ममता, अरनव और अंकित की ऊर्जा को वे अहम मानते हैं, जिनकी मेहनत के चलते इस कार्यशाला का आयोजन सफल हो सका। बीते 17 वर्षों से अभिनय के क्षेत्र में ट्रेनिंग दे रहे शिवा कहते हैं, जो हो रहा है, स्क्रीन उसका आईना है। इसमें युवाओं की भागीदारी बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि वे ही अपने समय व वर्ग के सही मायने में दूत हैं।
एकडेमी की निदेशक दामिनी अपनी अगली योजना के बारे में बताती हैं कि आगामी फरवरी में भी एक कार्यशाला चड़ीगढ़ में प्रस्तावित हैं। सबसे पहले प्रतिभागियों को पोर्टफोलियो, फैशन शो और प्रिंट सूट का लाभ देने की योजना है।
साथ ही एक शार्ट फिल्म भी प्रस्तावित है, जिसके जरिए युवाओं को अपनी प्रतिभा दिखाने का मंच मिल सकेगा। दामिनी इस बात का संतोष है कि जम्मू-कश्मीर से लेकर बिहार की पट्टी के ग्रामीण युवा राष्ट्र की मुख्यधारा में जुड़ रहे हैं और अब उत्तर भारत के युवा खूब रंग जमाए हुए हैं।