ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (एटक) के प्रदेश स्तरीय समिति के सदस्य राजेश कश्यप ने कहा कि बारिश की वजह से अपेक्षाकृत कम लोग एकत्रित हुए। दिल्ली विश्वविद्यालय के नॉर्थ कैंपस में नागरिकता संशोधन कानून और नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन्स को भी इस प्रदर्शन जोड़ते हुए विरोध जताया गया।
इस प्रदर्शन को लेकर आम जनजीवन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा। दिल्ली में यातायात सेवाएं सामान्य रहीं। दिल्ली में 11 ट्रेड यूनियनों के संयुक्त मंच ने 16 सूत्रीय मांगों को मुद्दा बनाया है। जानकारी के अनुसार बैंक कर्मचारियों की अखिल भारतीय बैंक कर्मचारी संघ (एआईबीईए), अखिल भारतीय बैंक अधिकारी संघ (एआईबीओए), भारतीय बैंक कर्मचारी महासंघों और बैंक कर्मचारी सेना महासंघ सहित विभिन्न यूनियनों ने हड़ताल का समर्थन करने का फैसला किया है। बैंकों में राशि जमा करने, निकासी करने, चेक क्लियरिंग और विभिन्न वित्तीय साधनों को जारी करने का काम हड़ताल की वजह से प्रभावित हुआ।
ये हैं प्रमुख मांगें
- निजीकरण, निगमीकरण, ठेकेदारी प्रथा को तत्काल बंद किया जाये। इसका जनहित में रोका जाना चाहिए।
- नई पेंशन योजना रद्द करने के साथ साथ सभी के लिए घोषित लाभ आधारित गैर अंशदाई पुरानी पेंशन योजना बहाल होनी चाहिए।
- ठेके पर या ठेकेदारों के माध्यम से काम कर रहे कामगारों, दिहाड़ी, अस्थायी, एडहॉक व पार्ट टाइम कर्मचारियों, डाक सेवकों और सरकारी क्षेत्र में स्थायी प्रकृति के काम में नियुक्त लाखों योजना कर्मियों सहित तमाम कर्मचारियों को नियमित किया जाए।
- केंद्र और राज्य सरकार की सेवाओं में लगभग एक करोड़ खाली पदों को शीघ्र भरा जाए।