दिल्ली उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने मुख्य सचिव, नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (एनडीएमसी), दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) और दिल्ली सरकार को साफ-सफाई सुनिश्चित करने, मच्छरों को पनपने से रोकने का काम युद्धस्तर पर करने के लिए कहा है।
दिल्ली में डेंगू के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। कई अस्पतालों में आरक्षित बिस्तरों से ज्यादा मरीज भर्ती हैं। इस संकट को देखते हुए दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने उच्चस्तरीय बैठक कर मुख्य सचिव नरेश कुमार को युद्धस्तर पर डेंगू के खिलाफ तैयारी करने के निर्देश दिए हैं।
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मौसमी बदलाव के कारण इस बार डेंगू के मामले पिछले छह साल के मुकाबले सबसे अधिक हैं। दिल्ली के स्थानीय निकाय डेंगू के मामले सार्वजनिक नहीं कर रहे हैं जबकि पहले हर हफ्ते सोमवार को डेंगू की साप्ताहिक रिपोर्ट आती थी। डेंगू से दिल्ली में हालात लगातार खराब हो रहे हैं। करीब आधा दर्जन से अधिक लोगों की मौत की सूचना अलग-अलग अस्पतालों से मिली है, लेकिन प्रशासन इसकी पुष्टि नहीं करता।
सोमवार को दिल्ली उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने मुख्य सचिव, नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (एनडीएमसी), दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) और दिल्ली सरकार को साफ-सफाई सुनिश्चित करने, मच्छरों को पनपने से रोकने का काम युद्धस्तर पर करने के लिए कहा है। उन्होंने कहा है कि दिल्ली में डेंगू के बढ़ते मामले चिंताजनक हैं। सोशल मीडिया के माध्यम से उन्होंने कहा कि तापमान में गिरावट के बाद भी दिल्ली में डेंगू के बढ़ते मामले और उसके कारण अस्पतालों में तेजी से हो रही मरीजों की भर्ती हो रहे हैं। उन्होंने लोगों से जरूरी एहतियाती कदम उठाने की अपील की।
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निगम भी सतर्क
दिल्ली में बढ़ते डेंगू के मामलों को देखते हुए दिल्ली नगर निगम भी सतर्क हो गया है। निगम की मेयर डॉ शैली ओबरॉय ने कहा कि वह जल्द इस मुद्दे पर उच्च स्तरीय बैठक करेंगी। वहीं निगम के अन्य अधिकारियों ने बताया कि डेंगू की रोकथाम के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन इस बार लंबे समय तक हुई बारिश व बाढ़ के कारण जलभराव की समस्या बढ़ी, जिसके कारण मच्छरों का प्रजनन इस बार ज्यादा है।
अस्पताल में किए गए हैं इंतजाम
दिल्ली के सभी सरकारी अस्पतालों में डेंगू के बढ़ते मामलों को देखते हुए बिस्तर आरक्षित किए गए हैं। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के निर्देश पर दवाइयां व अन्य जरूरी सामान का स्टॉक रखने का भी आदेश दिया गया है। डॉक्टरों का कहना है कि इस बार बड़ी संख्या में मरीज आ रहे हैं। इनमें से कुछ मरीज गंभीर भी हो जाते हैं। ऐसे मरीजों के लिए अस्पतालों में पर्याप्त सुविधाएं हैं।