अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। यमुना नदी के बाढ़ क्षेत्र (खादर) की सीमा तय करने का काम संशोधित नक्शे के कारण फिलहाल अटक गया है। दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) ने राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) को दी प्रगति रिपोर्ट में बताया है कि निर्धारित 277 पिलरों में से 206 लगाए जा चुके हैं। शेष पिलर लगाने का काम नए नक्शे के कारण रोक दिया गया है।
यह कार्य वजीराबाद बैराज से ओखला बैराज तक करीब 22 किलोमीटर लंबे यमुना क्षेत्र में किया जा रहा है। पिलरों के जरिए बाढ़ क्षेत्र की सीमा जमीन पर स्पष्ट रूप से चिह्नित की जा रही है, ताकि खादर क्षेत्र को सुरक्षित रखने के साथ भविष्य में होने वाले अतिक्रमण पर भी रोक लगाई जा सके।
डीडीए के अनुसार, इसी साल मार्च में जियो स्पेशल दिल्ली लिमिटेड (जीएसडीएल) और सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग की ओर से जारी नक्शे के आधार पर पिलर लगाने का काम शुरू हुआ था। इसे 31 जुलाई तक पूरा करने का लक्ष्य था। हालांकि, 6 जून को सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग ने डीडीए को संशोधित नक्शा भेज दिया। उस समय तक आधे से अधिक पिलर लगाए जा चुके थे।
डीडीए के मुख्य अभियंता (बागवानी) ने बाढ़ नियंत्रण विभाग से कहा है कि संशोधित नक्शा पहले एनजीटी के समक्ष रखा जाए। अधिकरण के निर्देश मिलने के बाद ही आगे काम किया जाएगा। डीडीए के मुताबिक, नए नक्शे के चलते तय समय सीमा में काम पूरा करना मुश्किल हो सकता है और शेष पिलर लगाने के लिए अतिरिक्त समय मांगा जा सकता है। अधिकारियों के अनुसार, यह सीमा 100 साल की अनुमानित सबसे बड़ी बाढ़ के स्तर को ध्यान में रखकर तय की जा रही है।