एक्सप्रेसवे के पहले खंड की लंबाई 32 किलोमीटर है। इसको दो हिस्सों में तैयार किया जा रहा है। एक की लंबाई 14.75 किमी है। यह अक्षरधाम से शुरू होकर लोनी बॉर्डर पर खत्म होता है। वहीं, दूसरे पैकेज की लंबाई 16.85 किलोमीटर है। यह लोनी से ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे (ईपीई) बागपत तक जाता है।
देहरादून एक्सप्रेसवे के दिल्ली से बागपत तक के खंड को अप्रैल अंत तक शुरू करने की तैयारी है। इस खंड का काम पूरा हो चुका है। अब राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचआई) इसका सेफ्टी ऑडिट कराएगा। इसके लिए केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान की मदद ली जाएगी। बताया जा रहा है कि सेफ्टी ऑडिट में यदि कोई कमी नहीं आएगी तो इसका शुभारंभ हो जाएगा।
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अधिकारियों का कहना है कि सभी अधूरे कार्य पूरे कर लिए गए हैं। इनमें सबसे महत्वपूर्ण काम एक्सपेंशन ज्वाइंट का था। पहले जो एक्सपेंशन जॉइंट थे, वे मानक के हिसाब से नहीं थे। इस बार एक्सपेंशन ज्वाइंट मानक के हिसाब से लगाए गए हैं। अब केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान से सेफ्टी ऑडिट कराया जाएगा। एक्सप्रेसवे के पहले खंड की लंबाई 32 किलोमीटर है। इसको दो हिस्सों में तैयार किया जा रहा है। एक की लंबाई 14.75 किमी है। यह अक्षरधाम से शुरू होकर लोनी बॉर्डर पर खत्म होता है।
वहीं, दूसरे पैकेज की लंबाई 16.85 किलोमीटर है। यह लोनी से ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे (ईपीई) बागपत तक जाता है। पैकेज-एक की लागत 1100 करोड़ और पैकेज-दो की लागत 1323 करोड़ है। पैकेज-एक में 6.398 किलोमीटर और पैकेज-दो में 11.244 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड काॅरिडोर हैं। एक्सप्रेसवे को पिछले साल दिसंबर में ही शुरू करने की योजना थी, लेकिन एलिवेटेड सेक्शन में वेयरिंग फॉल्ट होने से ये शुरू नहीं हो पाया।
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यमुनापार में कम होगा ट्रैफिक का दबाव
एक्स्प्रेसवे के शुरू होने से पहले यमुनापार में वाहनों का दबाव कम होगा। दिल्ली वालों को इस हिस्से में कोई भी टोल नहीं देना होगा। एक्सप्रेसवे के इस हिस्से में अक्षरधाम, गांधी नगर-गीता कॉलोनी, आईएसबीटी-दिलशाद गार्डन मार्ग, खजूरी पुस्ता मार्ग और सिग्नेचर ब्रिज मार्ग पर एग्जिट और एंट्री पॉइंट बनाए गए हैं। इसमें शास्त्री पार्क रेडलाइट के पास अलग से एक लूप बनाया गया है। इसकी मदद से कश्मीरी गेट बस अड्डे की तरफ से आने वाले वाहनों का हाइवे पर जाना आसान होगा। इसी तरह से खजूरी खास में भी एग्जिट व एंट्री प्वाइंट बनाए गए हैं। खास बात यह है कि दिल्ली में एक्सप्रेसवे में प्रवेश करने और बाहर निकलने वाले यात्रियों को टोल नहीं देना होगा।
कई अड़चनों से परियोजना में हुई देरी
एक्सप्रेसवे का काम कई अड़चनों के कारण देरी से पूरा हुआ है। इसका काम 2023 में ही पूरा होना था, लेकिन जमीन अधिग्रहण और तकनीकी समस्याओं के कारण परियोजना में देरी हुई।