नोएडा जैसे हाईटैक शहर में महिलाएं खुद को असुरक्षित मानती हैं। बाजार जाती हैं तो रास्ते में डर लगा रहता है कि कहीं बाइकर्स उनसे कुछ छीन न लें। डर के चलते वैसे भी महिलाओं ने गहने पहनने बंद कर दिए हैं। जो महिलाएं नौकरीपेशा हैं, उन्हें शाम या देर रात घर आते वक्त डर लगा रहता है। सार्वजनिक वाहनों में छेड़छाड़ छीना-झपटी की घटनाएं आम होती जा रही हैं।
दिल्ली में टैक्सी चालक द्वारा रेप की वारदात ने सबको झकझोर दिया है। धौला कुआं गैंगरेप कांड के बाद से कैब कंपनियों पर चाबुक लगाने का पुरजोर दावा दिल्ली पुलिस ने किया था। एनसीआर में दिल्ली के बाद सबसे ज्यादा कंपनियां नोएडा में हैं। इनमें एडोब, आईबीएम, एरिक्सन, सैमसंग जैसी कंपनियां शुमार हैं जो अमेरिका, स्वीडन, जर्मनी आदि देशों से संचालित होती हैं। इन कंपनियों में कार्यरत लोगों को नाईट शिफ्ट करनी पड़ती है। जिसके लिए कर्मचारियों को कंपनी कैब उपलब्ध कराती है।
धौला कुआं रेप कांड के बाद दिल्ली स्थित प्रशांत विहार के तत्कालीन एसीपी बलवंत सिंह ने एक आदेश किया था कि दिल्ली-एनसीआर में चलने वाले प्रत्येक कैब में नाईट शिफ्ट के दौरान कंपनी का सुरक्षा गार्ड होना जरूरी है। इतना ही नहीं प्रत्येक कैब चालक का विवरण (बायो डाटा) संबंधित थाने में दिया जाए, साथ ही कैब में जीपीएस लगा हो। मगर 6 दिसंबर को गुड़गांव की एक कंपनी में कार्यरत युवती के साथ जिस तरह से कैब चालक ने रेप किया और फरार होने में सफल रहा, उससे साफ लगता है कि कंपनी पुलिस के आदेश को ताक पर रख कर पैसे कमाने में लगी हुई है।
सबसे ज्यादा दहेज पीड़ित
देश में दहेज लेना व देना अपराध है। नोएडा सेक्टर-39 स्थित महिला थाने की थानाध्यक्ष नरेंद्री सैनी ने बताया कि थाने में सबसे ज्यादा दहेज उत्पीड़न के केस आते हैं। जबकि एक्ट 1968 के अनुसार अगर कोई व्यक्ति दहेज लेता और देता है तो उसे पांच साल की सजा और पन्द्रह हजार का जुर्माना देना पड़ेगा। ऐसे कानून होने के बाद भी थानों में सबसे ज्यादा दहेज उत्पीड़न के मामले आते हैं। इसके साथ ही यह भी बताया कि कई बार दहेज न देने का विरोध करने पर महिलाओं की पिटाई की जाती है।