फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

महिला थाना: काम दो गुना, स्टाफ आधा

Wed, 03 Aug 2016 10:16 AM IST
ऐहतेशाम उद्दीन अहमद/अमर उजाला, फरीदाबाद
विज्ञापन
Women police Station
विज्ञापन
फरीदाबाद में पीड़िताओं की समस्या सुलझाने वाला महिला थाना खुद काम की अधिकता और महिला पुलिसकर्मियों की कमी से जूझ रहा है। प्रतिदिन औसतन 20 से 25 शिकायतें और इतनी ही कांसलिंग के अलावा गंभीर और साधारण तरह के अपराधों की तफ्तीश करने की जिम्मेदारी महज 35 पुलिसकर्मियों के जिम्मे है। जिले के किसी भी थाने में दर्ज महिला उत्पीड़न की शिकायतों की जांच के लिए भी महिला थाने से ही स्टाफ तैनात किया जाता है।
विज्ञापन

महिला पुलिस के 51 फीसदी पद खाली
2151 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैली औद्योगिक नगरी की महिलाओं की सुरक्षा की जिम्मेदारी महिला पुलिस की है। पुलिस कमिश्नरेट (सेेंट्रल, एनआईटी और बल्लभगढ़ जोन) के लिए कुल 360 महिला पुलिसकर्मियों के पद स्वीकृत हैं। वर्तमान में महज 177 पुलिसकर्मी ही कार्यरत हैं। इंस्पेक्टर के स्वीकृत तीन पदों में एक खाली है। सब इंस्पेक्टर के आठ और एएसआई के 18 पद हैं। हेड कांस्टेबल के 44 पद हैं, इनमें से 31 पद यानी दो तिहाई से ज्यादा सीटें खाली हैं। कांस्टेबल के 287 स्वीकृत पद हैं इनमें आधे से ज्यादा 151 पद खाली हैं। इंस्पेक्टर रैंक की एक महिला पुलिसकर्मी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि काम की अधिकता और स्टाफ की कमी की वजह से छुट्िटयां भी नहीं मिल पाती हैं।
महज 35 महिला कर्मियों पर है थाने की जिम्मेदारी
महिला थाने से मिली जानकारी के मुताबिक थाने में एक इंस्पेक्टर चार सब इंस्पेक्टर, सात सब इंस्पेक्टर, दो हेडकांस्टेबल और 20 महिला सिपाही तैनात हैं। महिला थाने की स्थापना 27 अगस्त 2015 से 25 जुलाई 2016 के ग्यारह महीनों में घरेलू हिंसा, सीएम विंडो आदि से 2312 शिकायतें मिली। इनमें से 2133 शिकायतों का निपटारा आपसी सहमति, काउंसलिंग समझौता आदि के जरिये कराया गया। महिला थाना इंचार्ज इंस्पेक्टर सुशील के मुताबिक थाने में प्रतिदिन दहेज उत्पीड़न, घरेलू हिंसा, पारिवारिक विवाद आदि के 15 से 20 मामलों की काउंसलिंग की जाती है। इस वर्ष 25 जुलाई तक तीनों जोन के सभी 18 थानों में दहेज उत्पीड़न के 279, बहला फुसलाकर भगा ले जाने के 136 और दुष्कर्म के 66 केस दर्ज किए गए। इनमें सेे 176 मामले महिला थाने के हैं। अन्य थानों में दर्ज किए गए मामलों की जांच भी महिला थाने के ही जिम्मे है। इंस्पेक्टर सुशील के मुताबिक जिले के किसी भी थाने में महिला उत्पीड़न से संबंधित शिकायत दर्ज होती है तो उसकी जांच के लिए महिला थाने से ही आईओ भेजी जाती है।
विज्ञापन

जांच अधिकारियों पर काम का बोझ
महिला थाने में कुल दो सब इंस्पेक्टर और सात महिला एएसआई हैं। इस साल सिर्फ महिला थाने में 176 गंभीर अपराधों के केस दर्ज किए गए।  इनकी जांच इन नौ पुलिस अधिकारियों के जिम्मे है। जांच के अलावा प्रतिदिन आठ से दस दंपति या परिवारों की काउंसलिंग की जिम्मेदारी भी निभानी पड़ती है। एक एसएसआई स्तर की पुलिस अधिकारी ने बताया कि उसके पास एक ही समय में आठ से दस जांच का जिम्मा रहता है। उसके मुताबिक महिला थाने में कम से कम 15 एसएसआई और हों तो जांच प्रक्रिया तेजी से बढ़े।
जांच अधिकारियों को ट्रेनिंग की जरूरत
एसीपी स्तर के एक पुलिस अधिकारी के मुताबिक महिला थाना बनने से पहले ज्यादातर केसों की जांच पुरुष एएसआई या सब इंस्पेक्टर ही किया करते थे। बहुत ही कम महिला पुलिसकर्मियों को जांच अधिकारी बनाया जाता था। महिला थाना बनने के बाद इन महिला कर्मियों को बिना ट्रेनिंग दिए ही जांच अधिकारी बनाया जाने लगा। प्रशिक्षण नहीं मिलने की वजह से महिला पुलिसकर्मियों को जांच करने में दिक्कत आती है।
हर जोन में बन सकते हैं महिला थाने
फरीदाबाद पुलिस कमिश्नरेट के एकमात्र महिला थाने पर काम का बोझ देखते हुए भविष्य में हर जोन में एक महिला थाना बनाया जा सकता है। डीसीपी स्तर के एक अधिकारी ने बताया कि शासन स्तर पर इस तरह की चर्चाएं चल रही हैं। रक्षाबंधन पर सरकार कोई नई घोषणा कर सकती है। कुछ दिन जिले में आए एडीजीपी कानून-व्यवस्था अकील मोहम्मद ने तीनों जोन में महिला हेल्पलाइन खोले जाने की घोषणा की थी।
स्टाफ की कमी है और शिकायतें बहुत ज्यादा आती हैं लेकिन हमारे प्रयास में कोई कमी नहीं है। हमारे सभी मातहत बेहतर काम कर रहे हैं। 2312 शिकायतों में से 2133 का निपटारा इस कम स्टाफ ने ही किया है। कुछ दिन पूर्व हुई बैठक में मुख्यमंत्री मनोहरलाल ने हमारी समस्याएं पूछी थीं तो उन्हें स्टाफ की कमी से अवगत कराया था। अगले साल तक स्टाफ मिलने की संभावना है।-पूजा डाबला, एसीपी क्राइम अगेंस्ट वूमन, फरीदाबाद
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें