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इसके कारण डिप्रेशन में चली जाती हैं महिलाएं!

Sat, 18 Jan 2014 10:43 AM IST
अमर उजाला, नोएडा
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महिलाओं में चालीस से पचास की उम्र के दौरान मेनोपॉज की स्थिति से गुजरते समय कई महिलाएं डिप्रेशन से घिर जाती हैं।
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फोर्टिस नोएडा में वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. वनिका भास्कर प्रिम ने बताया कि हारमोनल इंबैलेंस से पीरियड्स में गड़बड़ी के साथ महिलाओं को कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

उन्होंने बताया कि युवावस्था में ही लड़कियों को एनिमिक होने से बचना चाहिए। इस दौरान आयरन, कैल्शियम वाली खाद्य सामग्री का भरपूर उपयोग करना चाहिए ताकि आगे ऐसी समस्या का सामना न करना पड़े।
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इसके लिए दूध, पनीर, अंडे, मछली, हरी सब्जियां, दालें, चने आदि का सेवन सबसे अच्छा स्रोत हैं। डॉ. वनिका ने बताया कि मेनोपॉज की स्थिति के दौरान महिलाओं को शारीरिक दिक्कत ही नहीं मानसिक तनाव से भी बचना चाहिए। जिससे हारमोंस बदलाव के दौरान दिक्कत न हो।

क्या होती हैं समस्याएं?
महिलाओं में पीरियड्स का समय बढ़ने या घटने के दौरान माइग्रेन (सिर में दर्द), आस्टोपेनिया (आर्थराइटिस के पहले की स्थिति या जोड़ों का दर्द, हड्डियां कमजोर होना) जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। कई महिलाएं डिप्रेशन में भी चली जाती हैं। इसके अलावा नींद न आना, चिड़चिड़ेपन का भी सामना करना पड़ता है।
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क्या है उपाय?
महिलाओं को आयरन, कैल्शियम की पूर्ति करनी चाहिए। वहीं, खाली समय गुजारने की अपेक्षा ज्यादा से ज्यादा समय अपने आपको काम में व्यस्त रखना चाहिए। वजन को कम करने के लिए सुबह-शाम जॉगिंग या फिजिकल एक्टिविटी करें। इस दौरान किसी स्त्री रोग विशेषज्ञ से भी परामर्श जरूर लें।
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