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छेड़छाड़ का विरोध किया तो हो गईं टीम से बाहर

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सच्चाई का साथ देने की इतनी बड़ी कीमत चुकानी होगी यह उन महिला फुटबालरों ने सपने में भी नहीं सोचा था जो यूपी फुटबाल संघ के कर्ता-धर्ता मोहम्मद शमसुद्दीन के खिलाफ धरना प्रदर्शन कर न्याय की गुहार लगा रही थीं।
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नेशनल वूमेन चैंपियनशिप के कैंप में शामिल 25 महिला फुटबालरों को यूपी की टीम में इस वजह से शामिल नहीं किया गया, क्योंकि उन्होंने छेड़छाड़ की शिकार अपनी साथी के लिए आवाज उठाई।

हैरानी तो इस बात की है कि दादागिरी की हदें पार कर जाने के बावजूद ऑल इंडिया फुटबाल फेडरेशन चुप्पी साधे बैठा है।

'साहब चुनाव में व्यस्त हैं'

इन लड़कियों ने एआईएफएफ से शमसुद्दीन के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग उठाई लेकिन कार्रवाई तो छोड़िए, टीम से बाहर होकर लड़कियों का भविष्य ही दांव पर लग गया है। चयन प्रक्रिया में इतने बड़े हस्तक्षेप के बावजूद एआईएफएफ चुप है।

नाम नहीं छापने की शर्त पर अपनी व्यथा बताने वाली एक महिला फुटबालर ने खुलासा किया कि उन्होंने किस-किसके पास चयन की गुहार नहीं लगाई।

सबसे पहले टीम में नहीं चुने जाने की बात उन्होंने बनारस के जिला खेल अधिकारी से की। उन्होंने डीएम से मिलने को कहा। वहां उन्हें जवाब मिला साहब चुनाव में व्यस्त हैं। एक दिन 'आप' नेता मनीष सिसोदिया भी उनसे मिले। उनकी यही मांग थी कि चयन में गड़बड़ी नहीं हो।
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कोच ने कहा, धरना कर लें या प्रैक्टिस

आसाम में जो टीम भेजी गई है वह नए सिरे से चुनी गई है। मंगलवार को यही टीम नेशनल में आगाज करेगी। टीम के कोच भैरव दत्त स्वीकार करते हैं कि नई टीम को चुना गया है। उनका तर्क है कि लड़कियां या तो धरना प्रदर्शन कर लेतीं या फिर प्रैक्टिस।

इंटर डिस्ट्रिक्ट में दिखाए प्रदर्शन के आधार पर राज्य भर से 85 लड़कियां ली गई थीं। इनमें से 25 का चयन कैंप के लिए किया गया। लेकिन इन्होंने अनुशासन भंग किया है। इस वजह से उन्हें बाहर किया गया।

एआईएफएफ के सेक्रेटरी जनरल कुशल दास का कहना है कि मामले में पुलिस जांच कर रही है। वह ऐसे में कुछ नहीं कर सकते जो भी देखना है एक्जीक्यूटिव कमेटी देखेगी।
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