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यहां बालकनी में आते ही महिलाएं होती हैं अश्लील इशारों का शिकार

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तिहाड़ जेल के डीआईजी और जनसंर्पक अधिकारी मुकेश प्रसाद ने द हिदू को बताया कि उन्होंने इस तरह की बात पहली बार सुनी है।
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उनका कहना है कि अगर किसी कैदी को इस तरह की हरकत करते पकड़ा गया या ऐसी कोई शिकायत मिलती है तो उन्हे तुरंत ही दंडित किया जाएगा। हालांकि उन्होंने साफ कहा कि जेल की दिवारों को ऊंचा नही किया जा सकता।

डीआईजी ने कहा कि 1957 में जब यह जेल बनाई गयी थी उस वक्त किसी ने नहीं सोचा था कि आस-पास रहने वाली इमारतें कैदखाने से दिखाई देंगी।

जेल को शहर से बाहर इसीलिए बनाया गया था ताकि बाहर रहने वालों का समाजिक जीवन इससे प्रभावित न हो। प्रकाश का कहना है कि मंडावली में शुरु होने वाले जेल के आस-पास भी ऊंची इमारतों का निर्माण हो चुका है जो चिंताजनक है।
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अभद्रता, इशारेबाजी और अश्लीलल इशारों से हैं परेशान

अपराधी को जेल में डाला जाता है ताकि समाज को उसके बुरे प्रभावों से बचाया जा सके और उसे सुधरने का मौका दिया जाए। लेकिन तिहाड़ जेल में रहने वाले कैदियों की कारगुजारी जेल की उपयोगिता पर ही सवाल खड़ा करने वाला है।

असल में तिहाड़ जेल के आस-पास बने रिहायसी इलाकों के घरों में रहने वाली महिलाएं अपने ही घर की बालकनी में आने से घबराती हैं।

जेल प्रशासन ने भले ही कैदियों को भागने से रोकने के लिए ऊंची-ऊंची दीवारें बनवा दी हों लेकिन इसका कोई फायदा जेल के करीब रहने वालों लोगों को नहीं हो रहा है।

जेल में रखे गए विचाराधीन कैदियों के अश्लील इशारों और भद्दे कमेंट्स ने आस-पास बने घरों की महिलाओं का जीवन न सिर्फ प्रभावित किया है बल्कि वह अपने घर में ही असुरक्षित महसूस करने लगी हैं।

बालकनी में खड़ा होना हुआ दुश्वार

तिहाड़ के नजदीक बने घरों में रहने वाली महिलाओं ने शिकायत की है कि जेल के कैदी बालकनी में खड़े होने पर उन्हें देख गंदे इशारे करते हैं।

हैरान करने वाली बात यह है कि जेल की दीवार को भले ही काफी ऊंचा बनाया गया है, लेकिन इससे आस-पास के लोगों को कोई फायदा नहीं हो रहा।

असल में जेल के नजदीक जनकपुरी के सी ब्लाक में बने अपार्टमेंट और घरों की ऊंचाई इतनी है कि जेल के अंदर से ही उनकी बालकनी और टैरिस दिखाई देते हैं। हालांकि इन जेल और घरों के बीच की दूरी 150 मीटर है।

बावजूद इसके कैदियों के लिए जेल के सामने बने घरों के लोगों और उनकी गतिविधियों को देखना आसान है। 15 मीटर तक ऊंची जेल की दीवारें भी कैदियों को उन घरों में झांकने से रोक नहीं पातीं।

इकट्ठा होकर करते है ये कैदी इशारेबाजी

जेल में बंद विचाराधीन कैदी बालकनी में महिलाओं को देखते ही अश्लील इशारे करना शुरु कर देते हैं और सीटी भी मारते हैं। दूसरी और तीसरी मंजिल पर रहने वाले परिवारों को इस समस्या का सबसे ज्यादा सामना करना पड़ता है।

एक महिला ने अपनी आपबीती सुनाते हुए बताया कि कभी-कभी 30-40 कैदी एक पेड़ के नीचे आकर जमा हो जाते हैं और उनकी कमर की तरफ इशारा करते हुए बेहद आपत्तीजनक इशारे करते हैं।

इतना ही नहीं महिलाओं या लड़कियों को परेशान करने के लिए ये कैदी कभी शीशे से तो कभी किसी प्लेट से उसकी चमक से उनकी घक की तरफ रोशनी कर परेशान करते हैं।
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आखिर क्यों नहीं करते शिकायत

ऐसी शिकायतें मिलने के बाद जब उन्हें कैदियो की पहचान करने के लिए कहा गया तो लोगों ने ऐसा करने से मना कर दिया। उनका कहना था कि वो यहां स्‍थायी तौर पर रहते हैं और अपना घर छोड़ कर नहीं जा सकते।

ऐसे में कैदियो की पहचान करने के बाद वो उनका पीछा कर सकते हैं। इस डर के चलते लोग ऐसे कैदियों की पहचान करने से इनकार कर देते हैं। इस इलाके में रहने वाली विद्या ने बताया कि इन कैदियो की अश्लील हरकतों से बचने के लिए वो केवल रात में ही अपने टैरेस पर आतीं हैं क्योंकि तब ये कैदी अपने अपनी सेल में बंद होते हैं।

उत्तर-पश्चिमी दिल्ली निवासी श्रु‌ति रत्तन ने बताया कि अभी कुछ समय पहले मैं अपनी कजन के घर गई थी। जब वह उनकी टैरेस पर आतीं तो कैदियों के सीटी की आवाज सुनयी पड़ती थी। साथ ही वो जेल से कूद कर पास आने के इशारे भी करते।

‌इन हरकतों से केवल घरों में रहने वाली महिलाएं ही परेशान नहीं हैं ‌बल्कि इन घरों में काम करने वाली नौक‌रानियां भी इससे पीड़ित हैं। यही कारण है कि कुछ ने तो इन घरों की बालकनियों में साफ-सफाई करने से मना कर दिया।
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