दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के राष्ट्रीय राजधानी में महिलाओं के लिए मेट्रो और बस यात्रा को मुफ्त बनाने के प्रस्ताव पर महिला सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मिली-जुली प्रतिक्रिया दी है और कुछ ने इसे लोकलुभावन कदम बताया है जबकि अन्य इस फैसले का स्वागत कर रही हैं।
केजरीवाल ने कहा कि उनकी सरकार का यह फैसला, जिसे 2-3 महीनों में लागू करने की उम्मीद है, महिलाओं को सार्वजनिक परिवहन प्रणालियों का उपयोग करने और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रोत्साहित करेगा।
हालांकि कुछ महिला कार्यकर्ताओं ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि महिला सुरक्षा का बसों और मेट्रों में मुफ्त सफर करने से कोई संबंध नहीं है। एक्टिविस्ट एनी राजा ने कहा कि महिलाएं "मूर्ख नहीं हैं" कि वे इस पर भरोसा करें कि "महिला सुरक्षा का इस फैसले से कोई ताल्लुक है।"
राजा ने कहा "चुनाव में हार ने उनकी रातों की नींद उड़ा दी है। अगर वह इतने ईमानदार हैं तो 181 हेल्पलाइन और इसके निजीकरण पर उनकी क्या राय है?
एक अन्य कार्यकर्ता छवि मेथी ने पूछा कि मुफ्त सफर कैसे महिला सुरक्षा में मदद कर सकता है। उन्होंने कहा कि यह एक आधारहीन कदम है। अगर सरकार इतनी चिंतित है, तो उसे शहर भर में महिलाओं के लिए सुरक्षाकर्मियों की संख्या बढ़ानी चाहिए।
एक अन्य महिला सामाजिक कार्यकर्ता वाणी सुब्रमण्यन ने कहा कि महिला सुरक्षा और मुफ्त सवारियों के बीच कोई संबंध नहीं है। यह सिर्फ एक लोकलुभावन कदम है और वे चुनावों से पहले महिलाओं को लुभाने की कोशिश कर रहे हैं।
हालांकि, कुछ कार्यकर्ताओं ने इस कदम का स्वागत किया है। महिला अधिकार कार्यकर्ता शबनम हाशमी ने कहा, "यह एक बहुत ही स्वागत योग्य कदम है। यह एक प्रगतिशील कदम है और विशेष रूप से गरीब वर्गों की महिलाओं को इससे मदद मिलेगी। वहीं बसों और मेट्रो में अधिक महिलाओं की वजह से वह खुद को सुरक्षित महसूस करेंगी।
दिल्ली विश्वविद्यालय में ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन से जुड़ी एक एक्टिविस्ट छात्रा कंवलप्रीत कौर ने कहा कि यह निर्णय स्वागत योग्य है। हम यह भी उम्मीद कर रहे हैं कि सरकार दिल्ली में छात्रों के लिए मेट्रो रियायती पास की लंबे समय से चली आ रही मांग को सुनेगी। उन्होंने कहा कि पिछले साल घोषित मेट्रो किराए में दो गुना बढ़ोतरी से छात्र बुरी तरह प्रभावित हुए हैं।