किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाली अमृता ने बताया कि वे बचपन से ही पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से बहुत प्रभावित रही हैं। इसकी बदौलत मेरे अंदर पब्लिक सेक्टर में काम करने की इच्छा जागृत हुई। अपनी मां रामकला को प्रेरणास्त्रोत मानने वाली अमृता ने बताया कि घर में बड़ी बेटी होने के बावजूद मां ने हमेशा मेरा हौसला बढ़ाया। उनकी बदौलत मैं यहां तक पहुंच पाई हूं।
काम कभी छोटा नहीं होता
बकौल अमृता, काम कभी छोटा या बड़ा नहीं होता है। मेरे ससुराल का परिवार और पति तपन का भी यही मानना है। शादी के बाद वे हमेशा मुझे प्रेरित करते हुए कहते हैं कि जिंदगी में कुछ भी करो, पर उसमें समाज की भलाई जरूर हो। शुरुआत में समाज में बहुत ताने मिले। लोगों ने ससुरालवालों के भी कान भरे, लेकिन मेरी सोच से परिवारवाले सहमत हुए। मैं मानती हूं कि महिलाएं किसी भी काम में पुरुषों से कम नहीं हैं। बस सोच को आगे बढ़ाकर काम करने की जरूरत है।
परिवार वाले भी बढ़ा रहे हैं हौंसला
महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी कैंपस से पढ़ चुकी अमृता का ससुराल खंडोड़ा (रेवाड़ी) है। पेशे से टैक्सी व्यवसायी पति बिजेंद्र उर्फ तपन भी अमृता के फैसले से खुश हैं। उनका कहना है कि अमृता बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ और बेटी बढ़ाओ की प्रतीक है। समाज के लिए एक मिसाल है।
ससुर अजीत सिंह कहते हैं कि सिटी बस सेवा में महिलाओं की भूमिका से समाज में एक सकारात्मक संदेश भी जाएगा। सीएम से मिलने को लेकर उत्साहित अमृता ने कहा कि रविवार को सीएम सर से मिलने के बाद मैं उन्हें इस बेहतरीन कार्य के लिए धन्यवाद देने के साथ रोडवेज बसों में महिलाओं को स्थायी परिचालक की नौकरी देने की मांग भी करूंगी।