दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल के प्रसूति विभागाध्यक्ष डॉ. वीके कदम बताते हैं कि नसबंदी का दो बार फेल होना दुर्लभ है। इसमें कोई लापरवाही नहीं है। किसी भी तरह के ऑपरेशन में शत प्रतिशत की गारंटी नहीं होती। महिला का बड़ा ऑपरेशन या उसके पति की नसबंदी इसके विकल्प हो सकते हैं।
10 हजार में से एक आता है सामने
विशेषज्ञों की मानें तो महिलाओं में नसबंदी फेल होने की संभावना बेहद कम होती है। करीब 10 हजार में से किसी एक का ऑपरेशन विफल होता है। ऐसा होने पर महिला का फिर से ऑपरेशन किया जाता है।
इस गर्भाधान को सरकार अपनी जिम्मेदारी मानते हुए 30 हजार का मुआवजा भी देती है। मगर नवाब और मेहनाज की मानें तो अभी तक अस्पताल और सरकार की ओर से उन्हें किसी भी तरह का मुआवजा नहीं मिला है।