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महागुन सोसायटी में हंगामे के बाद अवसाद में हैं हर्षू

Wed, 19 Jul 2017 09:32 PM IST
प्रगति मिश्रा/अमर उजाला, नोएडा

सार

हेडिंग:
डॉक्टर से कराया जा रहा इलाज, मां कर रहीं बेटी और नाती की देखभाल

नोएडा।
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विस्तार
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सेक्टर-78 की महागुन मॉडर्ने सोसायटी में एक सप्ताह पूर्व हुई तोड़फोड़ व पथराव के बाद अब भी पीड़ित सेठी परिवार सदमे से उबर नहीं सका है। मितुल सेठी की पत्नी हर्षू सेठी हंगामे के बाद से अवसाद में हैं। उनका अस्पताल में इलाज चल रहा है। हालांकि, मितुल ने कामकाज पर जाना शुरू कर दिया है।
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हंगामे की सूचना पाकर हर्षू की मां यहां रहने आ गई हैं। वही हर्षू व उनके बेटे की देखभाल कर रही हैं। घटना के बाद से सेठी परिवार इतना डरा हुआ है कि वह किसी भी अनजान शख्स से मिलने या बात करने से बच रहा है।

बुधवार दोपहर हर्षू सेठी की मां ने बहुत हिचकते हुए अमर उजाला संवाददाता से बात की। फ्लैट के बाहर खड़े-खड़े उन्होंने बताया कि बेटी हर्षू अवसाद का इलाज कराने के लिए डॉक्टर के पास गई है।
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डर के मारे वह लोग सोसायटी से बाहर निकलने में भी हिचक रहे हैं। हर पल लगता है कि कोई हमला न कर दे। पता नहीं इस हादसे से उबरने में कितना वक्त लगेगा। घटना के बाद उनकी बेटी-दामाद ने उन्हें फोन करके घर बुला लिया था।

मालूम हो कि सैकड़ों नौकर-नौकरानियों ने सेठी परिवार पर नौकरानी जोहरा को बंधक बनाकर पिटाई करने का आरोप लगाते हुए सोसायटी पर हमला कर दिया था। चार घंटे तक सोसायटी में जमकर तोड़फोड़ और पथराव चला था।

इस दौरान आरोपियों ने सेठी परिवार के फ्लैट में जमकर तोड़फोड़ की थी। जान बचाने के लिए सेठी परिवार को दो घंटे तक बाथरूम में बंद रहना पड़ा था। किसी तरह पड़ोसियों ने इनकी जान बचाई थी।

नौकरानियों के सामने रोजी-रोटी का संकट
हंगामे के बाद से सोसायटी ने लगभग 100 नौकरानियों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया है। सोसायटी में 350 नौकरानियां आती हैं। बाकी को क्लीन चिट देकर सोसायटी में दोबारा प्रवेश देना शुरू कर दिया गया है।

बुधवार को सोसायटी में मिली नौकरानियों ने बताया कि वह हंगामेे में शामिल नहीं थीं। पूरी जांच के बाद सोसायटी ने उन्हें प्रवेश दे दिया है। फिर भी कई फ्लैट के लोगों ने उनसे काम कराने से इंकार कर दिया है। लोग फिलहाल कोई नौकरानी रखना नहीं चाहते हैं।

ऐसे में अब उनके सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। वह लोग अब प्रबंधन के पास अपना नाम नंबर लिखवा रहीं हैंख् ताकि उन्हें किसी और घर में काम मिल सके। वहीं, जिन लोगों ने नौकरानियों को काम से हटा दिया है, उनका कहना है कि फिलहाल वह कुछ दिन अपना काम खुद करेंगे। इसके बाद अगर जरूरत महसूस होती है तो किसी प्लेसमेंट एजेंसी के जरिये नौकरानी रखी जाएगी।
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