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डेथ वैली गिरी महिला, तीन घंटे तक लड़ती रही जिंदगी और मौत की जंग

Tue, 02 May 2017 11:50 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, फरीदाबाद
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झील में तीन घंटे मौत से जूझने के बाद निकाली गई हेमा रानी। - फोटो : अमर उजाला
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सूरजकुंड इलाके में रविवार शाम डेथ वैली में पति और भाई के साथ घूमने गई सेक्टर 29 हाउसिंग बोर्ड निवासी हेमारानी झील में गिर गईं। करीब तीन घंटे तक पत्थर पकड़कर झील में खुद को डूबने से बचाया, सूचना पर मौके पर पहुंची सूरजकुंड के सिपाहियों ने रोप वे तैयार कर उन्हें बाहर निकाल कर बीके सिविल अस्पताल में भर्ती कराया।
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हेमारानी के भाई अनुज के मुताबिक रविवार शाम गाय को आटा और बंदरों को केले खिलाने का कार्यक्रम बना था। वह बहन हेमारानी और जीजा ईश्वर सिंह के साथ सूरजकुंड रोड स्थित डेथ वैली में डल झील के पास करीब साढ़े पांच बजे पशुओं को आटा, केला खिलाने पहुंचे। यहां झील देखकर हेमारानी उसके करीब चली गईं।

पानी में उनकी स्लिपर फिसल गई और वह झील में गिर पड़ीं। डूब रहीं हेमारानी के हाथ में पानी से बाहर निकाल हुआ एक पत्थर आ गया। वह उसे पकड़े रहीं। भाई अनुज और पति ईश्वर सिंह ने उन्हें बचाने के लिए अपनी पैंट शर्ट उतार बांध कर रस्सी जैसी बनाई और पानी में फेकी लेकिन वह नहीं निकल सकीं।
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मौत की झीलों का आकर्षण खींच ले जाता है लोगों को

झील में तीन घंटे मौत से जूझने के बाद निकाली गई हेमा रानी। - फोटो : अमर उजाला
जीजा साले ने कार में रखी रस्सी भी फेकी लेकिन वह भी छोटी पड़ गई, इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई। मौके पर पहुंची सूरजकुंड पुलिस ने हालात का जायजा लिया। इसके बाद करीब सौ मीटर लंबा रोप वे तैयार कर एक सिपाही हेमारानी तक पहुंचा।

उन्हें बाहर निकाल कर बीके सिविल अस्पताल पहुंचाया गया। देर रात वह अस्पताल से घर चली गईं। एसएचओ सूरजकुंड थाना इंस्पेक्टर पंकज कुमार ने बताया कि महिला के ठीक होने पर उससे पूछताछ की जाएगी।

मौत की झीलों का आकर्षण खींच ले जाता है लोगों को
अरावली की पहाडिय़ों से बेशकीमती पत्थर निकालने से बनीं यह कई सौ फिट गहरी खाई बरसाती पानी भरने से कृत्रिम झीलों में तब्दील हो चुकी हैं। खड़ी दीवारों वाली इन कृत्रिम झीलों के पानी का आकर्षण लोगों को और अंदर जाने के लिए प्रेरित करता है। एक कदम आगे जाने का सीधे कर्ई सौ फिट गहरी खाई में समा जाना होता है। खतरनाक कृत्रिम झीलों वाले अरावली के इस इलाके को प्रशासन ने डेथ वैली घोषित कर रखा है। प्रशासन की ओर से जगह जगह चेतावनी बोर्ड भी लगाए गए हैं। इन झीलों में के पास जाने और नहाने, कपड़े धोने आदि पर भी प्रतिबंध है, बावजूद इसके लोग इन झीलों की ओर आकर्षित होकर पहुंच जाते हैं।
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मौत की झीलों में समाने वाले अधिकतर युवा   

मौत - फोटो : file
13 अप्रैल 2017- सिरोही स्थित कृत्रिम झील पर गए बीसीए स्टूडेंट अय्यूब की सेल्फी लेते समय पानी में डूबने से मौत हुई।  
31 मई 2016 - ओखला फेस-2 निवासी ङ्क्षपटू की डेथ वैली में डूबने से हुई।  
08 मई 2016 - भीकम कॉलोनी के करण की बड़वाली झील में डूबने से मौत हुई थी।  
29 फरवरी 2016- कृत्रिम झील में डूबने से द्वारका दिल्ली के रहने वाले तन्मय मिश्रा की मौत हो गई।
22 जुलाई 2015- दिल्ली टेक्निकल यूनिवर्सिटी में बी टेक स्टूडेंट की झील में डूबने से मौत हुई।
03 जून 2015- कृत्रिम झील में नहाते समय डूबने से विक्की कोहली की मौत हुई।
19 जून 2015 - गुरुकुल इंद्रप्रस्थ के समीप दो दोस्तों के साथ नहाने आए दसवीं क्लास स्टूडेंट की पानी में डूबने से मौत हुई।
15 मई 2015 - बड़वाली झील में डूबकर एक युवक की मौत हो गई थी।
29 मार्च 2014- रेडियो जॉकी अभय की सूरजकुंड झील में डूबने से मौत।
24 मार्च 2014 - तीन छात्र राघव, रवि और पंकज शर्मा खोरी-जमालपुर वाली झील में डूबे।
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