परिवार के मुताबिक, जीटीबी अस्पताल के वार्ड नंबर 10 में दाखिल गर्भवती उर्मिला ने 16 सितंबर को रात 11.20 पर एक बेटे को जन्म दिया था, डॉक्टरों ने उन्हें व परिजनों को बच्चा दिखा भी दिया था और सभी पेपरों में लिंग के सामने मेल भी लिखा था। सारा परिवार खुश था, लेकिन ये खुशी तीन घंटे में काफूर हो गईं। तीन घंटे बाद उर्मिला को बेटी थमा दी गई, जब उर्मिला व परिजनों ने विरोध किया तो आनन-फानन दस्तावेजों को बदल दिया गया और इस विषय को डॉक्टरों की गलती मानकर मामले को रफादफा करने का प्रयास किया जा रहा है।
विवाद के बाद पुलिस ने मामला भी दर्ज किया था। वहीं, जीटीबी अस्पताल के निदेशक सुभाष गिरी के मुताबिक, बवाल बढ़ने पर डीएनए जांच की सिफारिश की गई थी। डीएनए रिपोर्ट में बच्ची का पिता से डीएनए मेल हो गया है। लेकिन इसके बाद भी बच्चे की मां उर्मिला व परिजन ये मानने के लिए तैयार नहीं हैँ की उर्मिला ने बेटी को जन्म दिया था।