दिल्ली हाई कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को जेएनयू के लापता छात्र नजीब अहमद से एबीवीपी के 9 छात्रों के साथ विवाद के समय उपस्थित गवाहों के बयान दर्ज करने का निर्देश दिया है।
अदालत ने नाराजगी जताते हुए कहा आखिर अभी तक गवाहों के बयान क्यों नहीं दर्ज किए गए। अदालत ने स्पष्ट किया कि हमें मामले में परिणाम चाहिए।
न्यायमूर्ति विपिन सांघी और न्यायमूर्ति दीपा शर्मा की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई केदौरान पुलिस से पूछा कि अहमद से एबीवीपी छात्रों के साथ हुए विवाद के समय मौके पर उपस्थित गवाहो के बयान क्यों नहीं दर्ज किए गए।
खंडपीठ ने कहा बयान दर्ज होने के बाद ही पता चल सकती है कि आखिर अहमद को खतरे की क्या प्रकृति थी। अदालत ने कहा धमकी की प्रकृति क्या है, धमकी के लिए कौन से शब्दों का प्रयोग किया गया। अदालत ने पुलिस को कहा वे जल्द से जल्द गवाहों के बयान दर्ज करें।
लापता छात्र अहमद ने हॉस्टल में एक विवाद के दौरान इन 9 छात्रों में से एक को थप्पड़ मारा था और बदले में उन्होंने कथित तौर पर उसे धमकी दी थी।
पुलिस ने कोर्ट को सौंपी रिपोर्ट
लापता छात्र नजीब अहमद
- फोटो : अमर उजाला
सुनवाई के दौरान पुलिस ने अहमद के लैपटॉप और मोबाइल फोन के अलावा नौ छात्रों के मोबाइल फोन के बारे में केंद्रीय फॉरेन्सिक विज्ञान प्रयोगशाला, हैदराबाद की दो सीलबंद विश्लेषण रिपोर्ट भी प्रस्तुत की। रिपोर्ट में कहा गया है कि इन नौ छात्रों के मोबाइल फोनों से कुछ पता नहीं चल पाया और मोबाइल रिकार्ड के अनुसार वे सभी अहमद के गायब होने के दौरान हॉस्टल में थे।
एमएससी प्रथम वर्ष का छात्र नजीब अहमद अहमद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के छात्र विंग, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के सदस्यों के साथ विवाद के बाद कथित तौर पर 14 अक्टूबर की रात से जेएनयू छात्रावास से गायब है।
खंडपीठ अहमद की मां फातिमा नफीस द्वारा दायर बंदीप्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई कर रही है। उसने पुलिस को उनके बेटे को अदालत में पेश करने का निर्देश देने की मांग की है।
याची की और से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कॉलिन गोन्साल्व्स ने तर्क रखा कि इस मामले में सभी नौ छात्रों की मिलीभगत है और पुलिस को इन सभी को हिरासत में लेकर पूछताछ का निर्देश दिया जाए।
गवाहों ने लाई डिटेक्टर टेस्ट की नहीं दी मंजूरी
नजीब की मां
- फोटो : अमर उजाला
वहीं दिल्ली पुलिस की और से पेश अधिवक्ता राहुल मेहरा ने कहा कि नौ छात्रों ने अभी तक इस मामले में लाई-डिटेक्टर टेस्ट के लिए न तो सहमति दी है और न ही इनकार किया है। उन्होंने कहा छात्रों को टेस्ट के लिए आगे आना चाहिए।
खंडपीठ ने कहा छात्रों को पॉलीग्राफ टेस्ट के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। उन्हें स्वयं अपनी इच्छा से टैस्ट के लिए सहमत होना चाहिए। यदि वे संदेह की सुई के साथ रहना चाहते हैं तो क्या किया जा सकता है। अदालत ने मामले की सुनवाई 12 मई तय करते हुए कहा वे मामले में परिणाम चाहते है।