किसी महिला से पहले विवाह को छिपा कर दूसरी शादी करने व उससे संबंध बनाना रेप की श्रेणी का अपराध है। अदालत ने इस टिप्पणी के साथ आरोपी व्यक्ति को सात वर्ष कैद की सजा सुनाई है।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश कावेरी बबेजा ने अपने फैसले में कहा कि साक्ष्यों व गवाहों के बयानों से स्पष्ट है कि आरोपी पहले से ही शादीशुदा था और उसका एक बच्चा भी है। बावजूद उसने वैवाहिक वेबसाइट पर विज्ञापन देकर शिकायतकर्ता महिला से विवाह किया।
अदालत ने आरोपी के उस तर्क को खारिज कर दिया कि उसने महिला से रेप नहीं किया, बल्कि विवाह के बाद उसकी रजामंदी से ही संबंध बनाया। अदालत ने कहा कि महिला ने उसे पति मानते हुए संबंध बनाने की इजाजत दी थी और उसे इस बात का कोई आभास नहीं था कि आरोपी पहले से ही विवाहित है।
अदालत ने कहा कि ऐसे में महिला द्वारा संबंध बनाने की रजामंदी देने की कोई कानूनी मान्यता नहीं है और यह रेप की श्रेणी में आता है। इसके अलावा दूसरा विवाह भी अवैध है। अदालत ने कहा आरोपी ने महिला से रेप किया है अत: वे उसे सात वर्ष कैद की सजा देती है। उधर आरोपी का कहना है कि उसे फर्जी मामले में फंसाया गया है, लेकिन अदालत ने उसके तर्क को खारिज कर दिया।
पीड़िता के पिता ने विज्ञापन देखकर वर्ष 2009 में आरोपी से बेटी का विवाह करवाया था। इसके 10 दिनों बाद ही आरोपी ने कहा कि उसका पुणे में स्थानांतरण हो गया है और वहां चला गया। इसके बाद आरोपी ने महिला से बात करना बंद कर दिया और धमकियां देने लगा। महिला ने कहा कि आरोपी ने दो लाख के जेवरात, डेढ़ लाख रुपये नगद व अन्य सामान भी वापस नहीं किया।