दिल्ली विधान सभा चुनाव में दूसरी बार ताल ठोक रही आम आदमी पार्टी (आप) ने इस बार बेहद संजीदगी से टिकट दिए हैं। टिकट देते समय सीट के जातीय समीकरण के साथ इस बात का भी ध्यान रखा गया है, कि संबंधित सीट पर विपक्षी पार्टी नेता कितना दमदार है।
इसके सहारे चुनावी टक्कर को बराबर करने की कोशिश की गई है। यही वजह है कि एक साल बाद हो रहे चुनाव में पार्टी ने आधे पुराने उम्मीदवार बदल दिए। इस मामले में पूर्व विधायकों को भी नहीं बख्शा गया।
दिल्ली चुनाव के लिए ‘आप’ ने सभी 70 सीटों के उम्मीदवारों का ऐलान कर दिया है। इस बार पार्टी ने पिछले चुनाव के 38 उम्मीदवारों को टिकट नहीं दिया है। इसकी जगह नए चेहरों पर बाजी लगाई गई है।
पिछले 38 प्रत्याशियों को मैदान से हटाया
पिछला चुनाव लड़ने वाले 32 लोग ही इस बार मैदान में हैं। खास बात यह कि पार्टी ने अपने छह पूर्व विधायकों को ही टिकट नहीं दिया। इसकी भनक मिलते ही दो पूर्व विधायक पाला बदलकर भाजपा के साथ चले गए।
इसके साथ ही दूसरे स्थान पर रहे तीन उम्मीदवारों को टिकट नहीं दिया गया। तो आरकेपुरम से दूसरे नंबर पर रही शाजिया इल्मी और कालकाजी से धर्मवीर सिंह ने पार्टी छोड़ दी।
10 पूर्वांचली मैदान में
यूपी-बिहार से मतदाताओं को लामबंद करने के लिए ‘आप’ ने पूर्वांचल से ताल्लुक रखने वाले 10 उम्मीदवार उतारे हैं। इसमें पांच यूपी और पांच बिहार से हैं। यूपी के मूल निवासी मनीष सिसोदिया, गोपाल राय, कपिल मिश्रा, अखिलेश पति त्रिपाठी और आदर्श शास्त्री हैं। जबकि बिहार से सोमनाथ भारती, संजीव झा, रितू राज झा, वंदना कुमारी व राजेश ऋषि हैं।
छह महिलाएं भी
महिला उम्मीदवारों के मामले में ही ‘आप’ ने पिछले चुनाव को फॉलो किया है। पिछली बार की तरह इस बार भी पार्टी ने छह महिलाओं को टिकट दिया है।