रोज घटते-बढ़ते प्रदूषण के बीच अब हवाओं के मिजाज पर ही दिल्ली की सांस टिकी है। पश्चिम से आने वाली हवाएं बेशक पराली के धुएं के साथ दिल्ली पहुंचीं, लेकिन सतह पर हवा की रफ्तार अधिक होने से प्रदूषण का स्तर नहीं बढ़ सका।
सोमवार की तुलना में वायु गुणवत्ता सूचकांक में 42 अंकों की गिरावट दर्ज की गई। बृहस्पतिवार से पुरवाई हवा चलेगी। हवा की चाल घटने से प्रदूषण बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
सिस्टम फॉर एयर क्वालिटी एंड वेदर फोरकास्टिंग एंड रिसर्च (सफर) का कहना है कि मंगलवार को पंजाब, हरियाणा व सीमावर्ती क्षेत्रों में पराली जलाने की मामले में बढ़ोत्तरी दर्ज की गई। इस सीजन में सबसे ज्यादा 1031 पराली जलाने के मामले रिकार्ड किए गए।
वहीं, दिल्ली पहुंचने वाली हवा भी हरियाणा की तरफ से आई। इससे पराली के धुएं का हिस्सा 12 फीसदी से बढ़कर 14 फीसदी हो गया। बावजूद इसके प्रदूषण स्तर में कमी आई।
सफर के मुताबिक, इसकी बड़ी वजह हवा की चाल रही। पश्चिम से पराली के धुएं के साथ दिल्ली पहुंची हवाओं को करीब 35 किमी प्रति घंटे की रफ्तार ने प्रदूषकों का जमा नहीं होने दिया। नतीजतन सोमवार की तुलना में वायु गुणवत्ता सूचकांक में 42 अंकों की कमी दर्ज की गई। इस बीच सूचकांक 249 से घटकर 207 रिकार्ड किया गया। हालांकि, आने वाले दिनों में हालात में बदलाव होंगे।
बदलेगा हवा का रुख , बढ़ेगा प्रदूषण का स्तर
सफर का पूर्वानुमान है कि बृहस्पतिवार से एक बार फिर हवा का रुख बदलेगा। हरियाणा की जगह यह यूपी की तरफ से दिल्ली पहुुंचेगी। इससे पराली के धुएं की मात्रा कम होगी। लेकिन इस दौरान सतह पर चलने वाली हवाओं की चाल में कमी आएगी। नतीजा दिल्ली का अपना स्थानीय प्रदूषण भारी पड़ेगा। धीरे-धीरे प्रदूषण स्तर में बढ़ोतरी होगी। इसके बेहद खराब स्तर तक पहुंचने की आशंका है। नवंबर के पहले सप्ताह में मौसमी दशाएं शांत होंगी। इससे पहले सप्ताह में हवा की गुणवत्ता खराब होगी।
फैक्ट फाइल
दिल्ली में पराली के प्रदूषण का हिस्सा:
21 अक्तूबर: 12 फीसदी।
22 अक्तूबर: 14 फीसदी।
23 अक्तूबर: 19 फीसदी।
वायु गुणवत्ता सूचकांक
20 अक्तूबर: 238
21 अक्तूबर: 249
22 अक्तूबर: 207