लिंगानुपात को सुधारने में जुटे स्वास्थ्य विभाग का फोकस अब गर्भवती महिलाओं पर है। कन्या भ्रूण हत्या रोकने के लिए विभाग एक-एक गर्भवती महिला का रिकॉर्ड रखेगा। सबसे ज्यादा नजर उन महिलाओं पर रहेगी, जिनकी पहले से एक या दो बेटियां हैं। ग्रामीण क्षेत्र में ऐसी महिलाओं से आशावर्कर तथा एएनएम संपर्क में रहेंगी।
‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान के एक साल पूरा होने के बाद पूरे प्रदेश में लिंगानुपात सुधरने का दावा किया जा रहा है। कन्या भ्रूण हत्या को रोकने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने कई जगह छापेमार कार्रवाई की है। पीएनडीटी (प्री-नेटल डायग्नोस्टिक टेक्निक्स) के तहत और सख्ती बरती जा रही है। विभाग का मानना है कि लिंगानुपात गिरने की वजह जिले में कन्या भ्रूण हत्या और अवैध गर्भपात केंद्र हैं। इसमें अल्ट्रासाउंड केंद्र अहम किरदार निभा रहे हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में आशा वर्कर गर्भवती महिलाओं को विश्वास में लेकर ऐसे अल्ट्रासाउंड केंद्रों का पता लगाएंगी। साथ ही ऐसे अवैध गर्भपात केंद्रों का भी पता लगाया जाएगा, जिसकी जानकारी विभाग के पास नहीं है। अवैध गर्भपात केंद्रों के खुलासे के लिए विभाग ने दबिश देना शुरू किया है।पूरे जिले में 171 अल्ट्रासाउंड केंद्र हैं। अल्ट्रासाउंड केंद्र पर नकेल कसने के लिए प्रशासन ने सीसीटीवी लगाने का आदेश दिया है।
जिला स्वास्थ्य विभाग ने डॉक्टरों को भी स्पष्ट आदेश दिया है कि अगर किसी मरीज का अल्ट्रासाउंड कराया जा रहा है तो डॉक्टर को लिखना होगा कि आखिर वह क्यों कराया जा रहा है। वहीं, अल्ट्रासाउंड केंद्र को भी स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि फॉर्म में दिए गए 23 बिंदुओं में इसका स्पष्ट उल्लेख हो।
प्रशासनिक अधिकारी के मुताबिक कन्या भ्रूण हत्या पर रोक लगाना प्राथमिकता में शामिल है। इसके लिए ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में सभी गर्भवती महिलाओं को ट्रैक किया जाएगा। अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर निगरानी रखी जाएगी। लोगों को भी जागरूक किया जा रहा है। अवैध गर्भपात केंद्रों के खिलाफ छापेमारी अभियान शुरू कर दिया गया है।