हल्के वाहनों के लिए लाइसेंस बनवाने के लिए ऑटो से टेस्ट में शामिल नहीं हो सकेंगे। हल्के वाणिज्यिक वाहनों (एलएमवी)के लिए लाइसेंस जारी करने में परिवहन विभाग ने सतर्कता बढ़ा दी है। अब तक कार, मिनी बस व हल्के वाणिज्यिक वाहनों के लिए किसी भी वाहन से ऑटोमेटेड ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक पर टेस्ट में पास होकर दूसरे वाहनों को चलाने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा था। इसकी शिकायत मिलने के बाद विभाग ने सख्ती बढ़ा दी है। इसके लिए सॉफ्टवेयर में भी बदलाव किया गया है।
ऑटो, कार व मिनी बस चलाने के लिए भी एमएमवी लाइसेंस का प्रावधान है। इस बारे में शिकायत मिलने के बाद परिवहन विभाग ने केंद्र के आदेश के मुताबिक सतर्कता बढ़ा दी है। अब कार के लिए स्थायी ड्राइविंग लाइसेंस लेने के लिए ऑटो से टेस्ट में शामिल नहीं हो सकेंगे। इसके लिए कार चलाकर ही टेस्ट में पास करना जरूरी होगा। इस मामले में दिल्ली सरकार केंद्र को पत्र भी लिखने की तैयारी में है ताकि तिपहिया वाहनों के लिए अलग इंतजाम किए जा सकें। परिवहन विभाग के एक उपायुक्त के मुताबिक अब लाइसेंस के लिए ऑटो से टेस्ट देने पर चालक से एक फार्म भरवाया जाएगा। इसमें लिखा होगा कि वह ऑटो के लिए लाइसेंस लेना चाहते हैं। अगर कभी दुर्घटना होने पर लाइसेंस की जांच में पता चलता है कि ऑटो के लिए लाइसेंस का दूसरे वाहनों को चलाने में इस्तेमाल किया जा रहा है तो मुकदमा दर्ज किया जाएगा।
तकनीकी लिहाज से अलग लाइसेंस जरूरी
परिवहन विभाग के अधिकारी के मुताबिक, दरअसल मोटर कारों को मोड़ने पर त्रिज्या करीब पांच मीटर जबकि तिपहिया वाहनों के लिए यह तीन मीटर से भी कम होती है। ऐसे में दोनों वाहनों को चलाने में दक्ष होने के लिए जरूरी है तो अलग लाइसेंस हो। ऑटो में चार पहिया के बजाय दो पहिया वाहनों की तरह क्लच, एक्सीलेटर और ब्रेक होते हैं। मोटर कार के पहिये भी ऑटो से 1.5 से 2 गुना होते हैं। तकनीकी लिहाज से भी दोनों को एक जैसा नहीं माना जा सकता है।