अगले सप्ताह से जिले में टीबी (क्षयरोग) का जीन एक्सपर्ट टेस्ट शुरू हो जाएगा। इसके लिए मशीनें इंस्टॉल कर ली गई हैं। जिले में इस मशीन के शुरू होने के बाद एचआईवी मरीजों और बच्चों में टीबी की जांच आसान हो जाएगी।
दरअसल, सामान्य टीबी के बाद कई मरीजों में मल्टी ड्रग रेसिस्टेंट टीबी (एमडीआर-टीबी) हो जाती है, जिसमें आम टीबी की दवा का कोई असर नहीं होता है, लेकिन इसे पता करने के लिए विशेष तकनीक के जरिए टेस्ट किया जाता है।
जो अभी तक गुड़गांव जिले में उपलब्ध नहीं है। यहां के मरीजों के सैंपल लेकर उन्हें मेवात स्थित हसन खां मेवाती मेडिकल कॉलेज भेजा जाता है। सैंपल भेजने और रिपोर्ट आने तक दो से तीन दिन का समय लगता है। इसे देखते हुए स्वास्थ्य निदेशालय ने जिले में यह मशीन लगाने का निर्णय लिया है।
पहले यह मशीन सेक्टर-39 में शिफ्ट किए जाने पर विचार किया जा रहा था, लेकिन सिविल लाइन स्थित सामान्य अस्पताल के बाहर ओपीडी होने के कारण इसे यही लगाने का निर्णय लिया गया।
मशीन आने के साथ ही लैब टेक्निशियन को ट्रेनिंग भी दे दी गई है। इसके लिए क्षयरोग विभाग में अलग से लैब भी बनाया गया है। जिसका काम चल रहा है।
डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. विजय का कहना है कि मरीजों की सहूलियत को देखते हुए यह मशीन यहां लगाने का निर्णय किया गया है। इसके लिए सभी जरूरी औपचारिकताएं पूरी कर ली गई हैं। लैब में काम तेजी से चल रहा है। अगले सप्ताह में यह शुरू हो जाएगा।
एचआईवी प्रोजेक्ट से एनजीओ को हटाने पर नाको नाराज
प्रदेश में एड्स की रोकथाम के लिए काम कर रही गैर सरकारी संगठनों को हरियाणा स्टेट एड्स कंट्रोल सोसायटी द्वारा हटाने के मामले को नेशनल एड्स कंट्रोल संगठन (नाको) ने गंभीरता से लिया है।
केंद्रीय स्वास्थ्य विभाग ने हरियाणा स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव और नैको के उप-महानिदेशक डॉ. नीरज धींगड़ा ने हरियाणा के एड्स कंट्रोल सोसायटी के प्रोजेक्ट डायरेक्टर को पत्र लिखकर मामले को गंभीरता से हल करने का निर्देश दिया है।
दरअसल, प्रदेश सरकार ने एड्स कार्यक्रम में लगे 50 से अधिक एनजीओ की कार्य सेवा समाप्त कर दी है। इसमें अधिकांश लोगों को बिना किसी कारण के हटा दिया गया है। इनमें गुड़गांव की दो एनजीओ एडेंट और नेचुरल केयर भी शामिल हैं। जिन्हें ऑडिट में बेहतर साबित होने के बाद भी हटा दिया गया है।