संसदीय सचिव बनाए गए विधायकों के लिए कार्यालय क्यों बनाए गए थे ? हाईकोर्ट ने यह सवाल आप विधायकों के अयोग्यता मामले की सुनवाई करते हुए मंगलवार को पूछा। इन पूर्व विधायकों की ओर से दावा किया था इन्होंने कोई लाभ नहीं लिया। इसलिए इन्हें अयोग्य ठहराने का आयोग का फैसला सही नहीं है।
जस्टिस संजीव खन्ना व जस्टिस चंद्रशेखर की खंडपीठ ने पूछा कि संसदीय सचिवों के लिए कार्यालय क्यों बनाए गए थे। अगर कार्यालय बनाए गए थे तो इसका मतलब है यह लोग मंत्रियों का प्रशासनिक कामकाज देख रहे थे।
इन कार्यालयों से इन विधायकों को क्या मिल रहा था। अगर आपको कार्यालय दिया जाता है तो आप वहां जाते हैं और बैठते हैं। आप उसका इस्तेमाल करते हैं। हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी विधायकों के अयोग्यता मामले की सुनवाई करते हुए की है। याचिका पर अगली सुनवाई 15 फरवरी को होगी।
वहीं आप के पूर्व विधायकों की ओर से जिरह करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता केवी विश्वनाथन ने कहा चुनाव आयोग ने इस बात पर विचार नहीं किया कि इन पूर्व विधायकों ने कोई लाभ लिया था या नहीं। इन विधायकों को संसदीय सचिव बनाते हुए किसी तरह का वित्तीय लाभ नहीं दिया गया था।
याचिका पर जिरह करते हुए विश्वनाथन ने कहा इन विधायकों को विधानसभा सचिवालय में मंत्रियों को आवंटित कमरों में ही बैठने की जगह दी गई थी। इन्हें कमरों का आवंटन किया गया था लेकिन इस रोक दिया गया था। इन विधायकों को सरकारी काम के लिए सरकारी वाहन प्रयोग की अनुमति थी। इसके लिये विधायक किसी तरह की वसूली का कानूनी दावा नहीं कर सकते थे।
कोर्ट के समक्ष वरिष्ठ वकील ने कहा कोई पद लाभ का पद है या नहीं, इस विषय पर सुप्रीम कोर्ट के कई फैसले हैं लेकिन चुनाव आयोग ने इन फैसलों पर विचार किए बिना ही संसदीय सचिव के पदों को लाभ का पद मानते हुए विधायकों को अयोग्य ठहराया दिया।