बदरपुर-एस्कॉर्ट्स मुजेसर कॉरिडोर प्रोजेक्ट शुरुआत से लेकर आज तक समय की पाबंदी पर खरा नहीं उतर सका है। 6 सितंबर से चालू हुए इस रूट पर ट्रेनों की फ्रीक्वेंसी समय की पटरी पर नहीं आ सकी है। ट्रेनें अपने निर्धारित समय से बहुत देर या पहले चल रही हैं। इसका खामियाजा यात्रियों को उठाना पड़ रहा है।
रचना कसाना सेक्टर-28 में रहती हैं। बुधवार शाम उन्हें किसी काम से दिल्ली जाना था। शाम साढ़े छह बजे के करीब उन्होंने मेट्रो ट्रेन पकड़ी। दो स्टेशन तक ठीक चलने के बाद उनकी ट्रेन सराय स्टेशन पर करीब बीस मिनट तक खड़ी रही।
रचना ने बताया कि केंद्रीय सचिवालय तक पहुंचने में आम तौर से करीब 50 मिनट लगते हैं लेकिन यह ट्रेन करीब पौने नौ बजे रात को वहां पहुंची। देर हो जाने की वजह से उन्हें बिना काम किए लौटना पड़ा। लौटते समय भी मेट्रो ट्रेन ने सामान्य से ज्यादा समय लिया।
यह समस्या सिर्फ रचना कसाना की ही नहीं है बल्कि फरीदाबाद कॉरिडोर के अधिकतर यात्रियों की है। एनएच एक में रहने वाले अशोक भाटिया कहते हैं कि फरीदाबाद कॉरिडोर पर मेट्रो ट्रेनों की फ्रीक्वेंसी की समस्या 6 सितंबर को उसके शुरू होने से ही है।
वह रोजाना नीलम चौक अजरौंदा से दिल्ली जाने के लिए मेट्रो पकड़ते हैं। उन्होंने बताया कि ट्रेनें कभी कभी तो आधा घंटा से ज्यादा लेट हो जाती हैं।
ट्रेनों का तालमेल बनाने में होती है देरी: अधिकतर ट्रेनें सराय स्टेशन पर देर तक रोकी जाती हैं। इसकी वजह वह बदरपुर स्टेशन की व्यस्तता को बताते हैं। दरअसल केंद्रीय सचिवालय से आने वाली हर ट्रेन फरीदाबाद कॉरिडोर में नहीं आती।
इनमें से छह डिब्बों वाली ज्यादातर मेट्रो को बदरपुर से ही वापस कर दिया जाता है जबकि कुछ चार डिब्बों वाली भी वहीं से वापस की जाती हैं। ऐसे में बदरपुर स्टेशन पर आकर वापस होने वाली ट्रेनों से तालमेल बिठाने के लिए फरीदाबाद कॉरिडोर की ट्रेनों को या तो रोक दिया जाता है या फिर जल्दी भेजा दिया जाता है।
मालूम हो कि डीएमआरसी ने इस रूट की फ्रीक्वेंसी प्रति 6:40 मिनट निर्धारित की थी। इसे बाद में घटा कर चार मिनट करने का भी प्रयास किया गया, इसके बावजूद ट्रेनों को समय पर नहीं चलाया जा पा रहा है।
लेट ही रहा है यह कॉरिडोर : फरीदाबाद कॉरिडोर के निर्माण का निर्णय मार्च 2012 में लिया गया था। करीब 2600 करोड़ रुपये लागत के इस प्रोजेक्ट के पूर्ण होने की तिथि नवंबर 2014 निर्धारित की गई थी।
एनएचएआई और हुडा की ओर से जमीन मिलने में कुछ दिक्कतें आने पर इसकी डेडलाइन बढ़ाकर फरवरी 2015 की गई थी। इसके बाद अप्रैल और फिर जून 2015 की गई। आखिरकार करीब नौ माह देरी से 6 सितंबर 2015 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे देश को समर्पित किया। अब इस कॉरिडोर पर मेट्रो लेट लतीफ साबित हो रही हैं।
ट्रेनें समय पर चलें इसके लिए बाकायदा निगरानी की जाती है। कभी कभार कोई तकनीकी दिक्कत होने की वजह से ट्रेन भले ही थोड़ी देर लेट हो जाए अन्यथा एक मिनट से ज्यादा लेट नहीं होने दी जाती। यह भी इस कारण होता है कि 30 सेकेंड तक खुलने वाले मेट्रो के दरवाजों को यात्री बंद नहीं होने देते। -प्रवक्ता, डीएमआरसी