एमसीडी चुनाव के दौरान आप को खत्म करने का जिस तरह से षड्यंत्र रचा गया, उसके केंद्र कुमार विश्वास ही थे। साजिश रचने की सारी बैठकें विश्वास के घर पर हुई। कपिल मिश्रा ने इस मसले में उनका सहयोग किया।
गोपाल राय के मुताबिक, इसी कड़ी में विश्वास ने केजरीवाल और आप के विरोध में एक वीडियो जारी किया। बावजूद इसके पार्टी ने उनको राष्ट्रीय परिषद और आप के राष्ट्रीय सम्मेलन में बोलने का मौका दिया, लेकिन विश्वास ने इस मंच का इस्तेमाल भी आप को तोड़ने के लिए किया।
विश्वास ने भाजपा व कांग्रेस के भ्रष्टाचार पर न बोलकर आप के खिलाफ ही अपनी बात रखी। गोपाल राय ने कार्यकर्ताओं से सवाल किया कि क्या ऐसे शख्स को पार्टी राज्य सभा भेज दे जो आप को तोड़ने के षड्यंत्र का सूत्रधार है।
राज्य सभा में उससे पार्टी के हक में बोलने की क्या उम्मीद की जा सकती है। इसकी क्या गारंटी है कि वह वहां पार्टी को तोड़ने का मंच नहीं बना लेगा। गोपाल राय ने बताया कि ऐसे हालातों में पार्टी ने विश्वास को टिकट देना उपयुक्त नहीं समझा।
गोपाल राय ने कहा कि फिलहाल आरोप लग रहे हैं कि अरविंद केजरीवाल ने 50 करोड़ रुपये में टिकट बेच दिया है। कार्यकर्ताओं को तसल्ली से सोचने की नसीहत देते हुए उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार के सिस्टम को बचाने के लिए भ्रष्टाचारी आखिरी लड़ाई लड़ रहे हैं।
इसी वजह से हर तीसरे महीने आप को बदनाम करने की कोशिशें होती हैं। गोपाल राय ने कहा कि अगर केजरीवाल की नीयत में खोट होता तो वह दिल्ली सरकार के 40000 करोड़ रुपये के बजट में से हजारों-हजार करोड़ रुपये बना लेते। बिजली कंपनियों से सांठ-गांठ करके फंड जुटा लेते।
नीयत खराब होने पर केजरीवाल निजी स्कूलों, टैंकर माफियाओं, ड्रग्स माफिया के खिलाफ कार्रवाई नहीं करते। उन्होंने आरोप लगाने वाले को चेतावनी दी कि हिम्मत है तो बेवजह आप को बदनाम करने की जगह सारी एजेंसियों से जांच करा लो। सारा मसला अपने आप ही सामने आ जाएगा।