हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार को यह स्पष्ट करने का निर्देश दिया है कि ऐप आधारित टैक्सी सर्विस प्रदाता कंपनियों की वेबसाइट ब्लॉक क्यों नहीं की गईं। दायर जनहित याचिका में आरोप लगाया गया है कि प्रतिबंध के बावजूद इन टैक्सियों की सेवा जारी है।
मुख्य न्यायाधीश जी रोहिणी व न्यायमूर्ति आरएस एंडलॉ की खंडपीठ ने दिल्ली सरकार की अधिवक्ता जुबेदा बेगम को शपथपत्र सहित स्पष्ट करने का निर्देश दिया है कि इस दिशा में क्या कदम उठाए गए हैं।
खंडपीठ ने कहा कि जब ऐप आधारित कैब के संचालन पर प्रतिबंध है तो आप उनकी वेबसाइट बंद क्यों नहीं करते। दिल्ली पुलिस की एक विंग इस काम के लिए बनाई गई है। अदालत ने अधिवक्ता को इस मुद्दे पर सरकार से जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। अदालत ने मामले की सुनवाई 25 फरवरी तय की है।
सरकारी अधिवक्ता ने कहा कि सरकार ने कार्रवाई करते हुए पिछले सप्ताह 100 टैक्सियों को जब्त भी किया है। याचिकाकर्ता हरकेश गुप्ता ने कहा कि 8 दिसंबर को राजधानी में उबर कैब चालक द्वारा 27 वर्षीय युवती से रेप के बाद कैब पर रोेक लगा दी थी बावजूद इसके उबर, ओला इत्यादि कैब कंपनियां बिना रोकटोक काम कर रही हैं।