नोटबंदी के बाद बुरे दौर से गुजर रहे उद्योगों को इस बार आम बजट से बड़ी राहत मिलने की उम्मीद थी, लेकिन वित्त मंत्री अरुण जेटली अपनी बजट पोटली में से उद्योगों के लिए कुछ खास नहीं निकाल पाए।
राहत के नाम पर 50 करोड़ रुपये टर्नओवर वाली कंपनियों को पांच फीसदी टैक्स रिबेट से ही संतोष करना पड़ेगा। बजट में करों से राहत मिलने की आस लगाए बैठे कॉरपोरेट सेक्टर के हाथ इस बार खाली ही रहे।
इस बार आम बजट पर जीएसटी की आहट का असर साफ दिखाई दिया। मोदी सरकार के तीसरे आम बजट में अप्रत्यक्ष करों से छेड़छाड़ नहीं की गई। हालांकि, कॉरपोरेट सेक्टर उम्मीद जता रहा था कि एक्साइज ड्यूटी में तीन से चार फीसदी कमी लाकर सरकार जीएसटी से पहले औद्योगिक लिहाज से सकारात्मक माहौल बनाएगी, लेकिन बजट में कॉरपोरेट सेक्टर पर ध्यान नहीं दिया गया।