सुप्रीम कोर्ट ने आम्रपाली समूह को चेतावनी देते हुए कहा कि उसके प्रोजेक्ट को क्यों न नोएडा और ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी के हवाले कर दिया जाए? शीर्ष अदालत ने आम्रपाली समूह को इस पर अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है।
न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा और न्यायमूर्ति यूयू ललित की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि रिकॉर्ड से लगभग साफ है कि फ्लैट खरीदारों से मिले पैसे और उसके द्वारा किए गए खर्च के बाद करीब 382 करोड़ रुपये शेष हैं।
लिहाजा यह कहा जा सकता है कि आम्रपाली समूह ने अपना एक भी रुपया इन प्रोजेक्ट में नहीं लगाया। ऐसे में क्यों न आम्रपाली के लीज को निरस्त कर दिया जाए और सभी प्रोजेक्ट अथॉरिटी को दे दिए जाएं।
पीठ ने कहा कि अथॉरिटी को प्रोजेक्ट पूरा करने की जिम्मेदारी दी जाए। जिन संपत्तियों की बिक्री नहीं हुई है, उन्हें बेचकर काम पूरा कराया जा सकता है। अथॉरिटी को भी अपना बकाया मिल जाएगा। पीठ ने आम्रपाली के वकील गौरव भाटिया से पूछा कि आप बताइए कि आखिर खरीदारों से ली गई रकम कहां गई। 27 करोड़ रुपये नकद का क्या हुआ। भाटिया ने कहा कि खरीदारों से ली गई राशि से प्रोजेक्ट को पूरा किया गया।