आम आदमी पार्टी(आप)में उठापटक यूं ही नहीं चल रही है। इसका इशारा एमसीडी के चुनाव परिणाम के आंकड़े भी दे रहे हैं। एमसीडी में बेशक आप के 48 पार्षद बने लेकिन वार्ड की बजाय विधानसभा के चुनाव होते तो 67 विधायक वाली आप के सिर्फ 7 विधायक बनते।
वो भी मुस्लिम बहुल या दलित मतदाताओं की ताकत वाली सीटों पर इज्जत बची है। कांग्रेस के पांच विधायक बनते जिसमें 4 मुस्लिम बहुल हैं। एमसीडी चुनाव के मत विश्लेषण से यह साफ हुआ है कि विधानसभा के चुनाव होते तो भाजपा को 70 में से 57 सीटों पर जीत मिलती।
हालांकि कांग्रेस और आप के वोट जोड़ लें तो भाजपा को केवल सात विधानसभा सीटों पर जीतती। गांधी नगर, विश्वास नगर, रोहताश नगर, शकूरबस्ती, रोहिणी, तुगलकाबाद और शालीमार बाग में भाजपा के वोट दोनो पार्टी के वोट पर भारी पड़े हैं।
चुनावी आंकड़ों का विश्लेषक बताते हैं कि मुस्लिम सीटों पर वोट कांग्रेस और आप में बंटे जिससे भाजपा को बड़ी जीत मिली है। नहीं तो 21 विधानसभा सीटें ऐसी हैं जहां कांग्रेस और आप को जोड़कर 50 फीसदी से ज्यादा समेत 62 सीटों पर भाजपा से ज्यादा वोट मिले।
कांग्रेस की बात करें तो 2015 में 9 फीसदी वोट मिले थे लेकिन इस बार सबसे कम 10 फीसदी वोट नजफगढ़ विधानभा में मिले हैं। नजफगढ़ सीट अन्य के खाते में जाती क्योंकि यहां भाजपा, कांग्रेस और आप को मिलाकर 50 फीसदी वोट मिले हैं जबकि 50 फीसदी अन्य को मिले हैं।
कांग्रेस को तिमारपुर, गांधी नगर, सदर बाजार, हरि नगर, शाहदरा, जंगपुरा, बादली, घोंडा, कस्तूरबा नगर, कालकाजी, मटिया महल और चांदनी चौक में 30 फीसदी से 39 फीसदी तक वोट मिले हैं। आम आदमी पार्टी को 13 सीट पर 30 फीसदी से अधिक वोट समेत 37 सीटों पर 25 फीसदी से ज्यादा वोट आप को मिले हैं।