बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया को भी नहीं पता था कि संकल्प में राजीव गांधी का नाम जोड़ा गया है। संकल्प मात्र दंगों की निंदा के लिए ही लाया जाना था।
एक विधायक ने हाथ से संकल्प में राजीव गांधी का नाम जोड़कर विधायक जरनैल सिंह को सौंपा और उन्होंने भी उत्साह में उसे पढ़ दिया। सदन में विपक्ष की आवाज न के बराबर है। ऐसे में सभी विधायकों ने उस पर हामी भर दी। विपक्ष तो पहले से ही यह मांग कर रहा था।
संकल्प पास होने का पता चलते ही हंगामा हो गया। आप ने रातभर डैमेज कंटोल के लिए सभी को लगा दिया, लेकिन तीर कमान से निकल चुका था। इसके बाद अलका लांबा से त्यागपत्र मांग लिया गया। रात को ही लगने लगा था कि अलका से त्यागपत्र लेना आसान नहीं है। आप का एक धड़ा पूरी तरह अलका लांबा के पक्ष में खड़ा है और कई वरिष्ठ नेता भी उनसे त्यागपत्र लेने के विरोध में आ गए।
बताया जाता है कि गठबंधन के पक्षधर कांग्रेस नेताओं ने भी आप नेताओं को अपनी नाराजगी से अवगत करा दिया। सूत्रों के अनुसार, इसी के बाद तय किया गया कि किसी भी विधायक से त्यागपत्र न मांगा जाए, बल्कि इस मामले को यही खत्म करने की कोशिश की जाए। अलका को तेजतर्रार नेता माना जाता है। वह कांग्रेस छोड़कर ही आप में शामिल हुई थीं। आज भी कई कांग्रेस नेता उनके प्रति सहानुभूति रखते हैं।