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जेएनयू हिंसाः नकाबपोश हमलावर कौन थे, पुलिस ने झाड़ा पल्ला

Sat, 11 Jan 2020 04:53 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
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जेएनयू में मारपीट - फोटो : अमर उजाला
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जेएनयू में रविवार को हुई हिंसा की जांच में जुटी एसआईटी को जांच के दौरान बाहरी युवकों के कैंपस में होने की बात सामने आई है। माना जा रहा है कि बाहरी युवकों ने ही चेहरे ढक रखे थे। खास बात यह है कि एसआईटी बाहरी युवकों को चार दिन बाद भी पकड़ नहीं पाई है। 

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पुलिस को अभी तक बाहरी लोगों के बारे में कोई सुराग हाथ नहीं लगा है। पुलिस सीसीटीवी खराब होने की बात कहकर पल्ला झाड़ रही है। दूसरी तरफ पुलिस को हिंसा के मामले में 10 शिकायतें और मिली हैं। इस शिकायतों को एसआईटी को भेज दिया गया है। 

अपराध शाखा के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि एसआईटी ने बृहस्पतिवार को 13 छात्र, तीन सिक्योरिटी गार्ड और 12 प्रोफेसरों के बयान दर्ज किए या फिर उनसे बात की। प्रोफेसरों ने अपने बयान में कहा है कि जेएनयू में बाहरी छात्र मौजूद थे। 
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उन्होंने कहा है कि उन्हें जेएनयू में पढ़ाते हुए कई साल हो गए हैं। ज्यादातर छात्र उन्हें जानते हैं। अगर नकाबपोश छात्र होते तो वह उन पर हमला नहीं करते। प्रोफेसरों को इतना भरोसा है कि छात्र भले ही उनकी बात न माने, मगर उन पर हमला नहीं कर सकते। सभी प्रोफेसरों ने अपने बयान में यही कहा है। 

ऐसे में बाहरी युवकों को पकड़ने के नाम पर खुद को हाईटेक बताने वाली दिल्ली पुलिस के हाथ अब तक खाली है। एसआईटी को जांच करते हुए चार दिन हो गए हैं, मगर अभी तक किसी बाहरी हमलावरों का सुराग हाथ नहीं लगा है। जेएनयू में अब छात्र बयान देने आगे आ रहे हैं। 

हालांकि छात्र अपने विरोधी गुटों के सदस्यों का ही नाम बात रहे हैं। ऐसे में एसआईटी के पुलिस अधिकारियों का कहना है कि छात्रों के बयान दिल्ली पुलिस के लिए ज्यादा मायने नहीं रखती। पुलिस ने वार्डनों के बयान भी दर्ज किए हैं। 

हालांकि शुक्रवार शाम को एसआईटी प्रमुख डीसीपी डा. जॉय टर्की ने कहा कि जेएनयू में घुसना आसान होता है। जेएनयू में अगर कोई अंदर जाता है तो वह अपने साथ जितने लोगों को ले जाता है उनके नाम नहीं बल्कि प्लस लिखवाता है। उनका कहना है कि पुलिस गेटों के रजिस्टर को खंगाल रही है। 

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